शिक्षकविहीन न रहें विद्यालय, गुणवत्ता पर करें फोकस : योगी

योगी आदित्यनाथ सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर पूरी तरह सक्रिय है। स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार, शिक्षकों की नियुक्ति और छात्रों की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई अहम फैसले लिए गए हैं।

मुख्य बिंदु:

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए धन की कोई कमी नहीं – सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में कोई भी विद्यालय शिक्षकविहीन नहीं होना चाहिए।


“स्कूल चलो अभियान” को उत्सव का रूप दें – 1 से 15 अप्रैल और जुलाई में 15 दिनों तक घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल लाने के प्रयास होंगे।

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“सीएम मॉडल कंपोजिट” और “अभ्युदय कंपोजिट विद्यालयों” में सुधार – खेल के मैदान, ट्रेनिंग सेंटर और न्यू एज कोर्स जोड़े जाएंगे।


शिक्षक-छात्र अनुपात सुधारने पर जोर – खासतौर पर आकांक्षात्मक जिलों और ब्लॉकों में बेहतर शिक्षण सुविधाएं दी जाएंगी।


विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार – सभी स्कूलों में अलग-अलग शौचालय, पेयजल, बिजली, क्लासरूम, बाउंड्रीवाल और फर्नीचर सुनिश्चित किया गया है।


समर कैंप शुरू होंगेखेल-खेल में बच्चों को नई चीजें सिखाने के लिए सुबह के समय कैंप आयोजित किए जाएंगे।


RTE के तहत नामांकन में भारी वृद्धि2016-17 में 10,784 बच्चे आरटीई से लाभान्वित हुए थे, जबकि 2024-25 में यह संख्या 4.58 लाख से अधिक हो गई है।


छात्रों की उपस्थिति बढ़ी – 2010 में 57% उपस्थिति थी, जो 2024 में बढ़कर 71.4% हो गई। बालिकाओं का नामांकन भी लड़कों की तुलना में अधिक हुआ है।

निष्कर्ष

योगी सरकार शिक्षा सुधारों पर बड़ा निवेश कर रही है। खासतौर पर सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता, बुनियादी ढांचे और शिक्षकों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। यदि ये प्रयास सफल होते हैं, तो आने वाले वर्षों में यूपी में सरकारी स्कूलों का स्तर काफी ऊंचा हो सकता है।

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