जल्द स्थायी होंगे राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों के तदर्थ शिक्षक, 970 शिक्षकों को मिलेगा लाभ
लखनऊ। प्रदेश के राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों में कार्यरत तदर्थ शिक्षकों को जल्द ही स्थायी नियुक्ति का तोहफा मिल सकता है। समाज कल्याण निदेशालय द्वारा नियमावली में संशोधन की रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे जल्द ही शासन को सौंपा जाएगा। इस निर्णय से करीब 970 शिक्षकों को सीधा लाभ मिलेगा, जो 16-17 वर्षों से सेवा दे रहे हैं।
100 विद्यालयों में तदर्थ शिक्षक कर रहे हैं सेवा
समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित प्रदेश में 100 राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय हैं। इन स्कूलों में छात्रों को कक्षा 12 तक मुफ्त शिक्षा, भोजन और रहने की सुविधा दी जाती है।
✔ वर्ष 2008 या उसके बाद, विभिन्न समय पर करीब 970 शिक्षकों की नियुक्ति तदर्थ व्यवस्था के तहत की गई थी।
✔ इन शिक्षकों को नियमित शिक्षकों की तरह मूल वेतन और महंगाई भत्ते के आधार पर मानदेय दिया जाता है।
हालांकि, इतने वर्षों की सेवा के बावजूद ये शिक्षक स्थायी नियुक्ति की मांग कर रहे थे।
विनियमितीकरण के लिए कैबिनेट की मंजूरी जरूरी
शिक्षकों की मांगों को देखते हुए समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने निदेशक कुमार प्रशांत की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था, जिसने सभी मामलों की गहन समीक्षा की।
✔ सूत्रों के मुताबिक, कमेटी की रिपोर्ट पूरी हो चुकी है और यह तदर्थ शिक्षकों के पक्ष में सकारात्मक है।
✔ कार्मिक विभाग की अधिसूचना के अनुसार, 31 दिसंबर 2001 तक नियुक्त कार्मिकों को ही विनियमित करने का प्रावधान है।
✔ इसलिए, आश्रम पद्धति विद्यालयों के शिक्षकों को विनियमित करने के लिए प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी आवश्यक होगी।
शिक्षकों की मांग पूरी होने की उम्मीद
राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों के तदर्थ शिक्षक कई वर्षों से नियमितीकरण की मांग कर रहे थे। अगर कैबिनेट से मंजूरी मिलती है, तो 16-17 वर्षों से सेवा दे रहे इन शिक्षकों को स्थायी नियुक्ति का लाभ मिलेगा।
यह फैसला न केवल शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करेगा, बल्कि छात्रों को भी स्थायी शिक्षकों से बेहतर शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देगा।
निष्कर्ष
समाज कल्याण निदेशालय की रिपोर्ट के आधार पर कैबिनेट में प्रस्ताव जल्द भेजा जाएगा। यदि यह मंजूर होता है, तो राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों में कार्यरत 970 तदर्थ शिक्षक स्थायी रूप से नियुक्त हो जाएंगे। शिक्षकों और छात्रों के हित में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
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