कन्या प्राथमिक विद्यालय भैंसरी में विवाद: प्रभारी प्रधानाध्यापिका पर चाकू से हमला, जांच के आदेश

विद्यालय में शिक्षिकाओं के बीच बढ़ा तनाव, बीएसए ने दिए जांच के निर्देश
टड़ियावां (हरदोई) – विकास खंड टड़ियावां के कन्या प्राथमिक विद्यालय भैंसरी में एक गंभीर विवाद सामने आया है। विद्यालय में निरीक्षण से पहले प्रभारी प्रधानाध्यापिका बीना वर्मा और सहायक अध्यापिका सविता अंबेडकर के बीच कहासुनी के बाद मामला इतना बढ़ गया कि मारपीट और चाकू से हमला होने की बात सामने आई है।
घटना का पूरा विवरण
प्रभारी प्रधानाध्यापिका बीना वर्मा ने बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) व थाना टड़ियावां में दी गई शिकायत में बताया कि 4 मार्च को उन्हें सूचना मिली थी कि अकादमिक रिसोर्स पर्सन (ARP) विद्यालय निरीक्षण के लिए आने वाले हैं। इस दौरान वे विद्यालय का सुपरविजन कर रही थीं। जब वे सहायक अध्यापिका सविता अंबेडकर के कक्ष में पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि वह कुर्सी पर पैर रखकर बैठी थीं। उन्होंने सविता अंबेडकर से सही तरीके से बैठने के लिए कहा, जिससे नाराज होकर सहायक अध्यापिका ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया और फिर मारपीट करने लगीं।
बीना वर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि सविता अंबेडकर ने उन पर चाकू से हमला कर दिया, जिससे वे घायल हो गईं। इसके बाद विद्यालय में हड़कंप मच गया और अन्य शिक्षक एवं कर्मचारी मौके पर पहुंचे।
सहायक अध्यापिका ने भी लगाए आरोप
वहीं, दूसरी ओर सहायक अध्यापिका सविता अंबेडकर ने इस मामले में अलग ही कहानी पेश की है। उन्होंने जिलाधिकारी (DM) को दिए गए प्रार्थना पत्र में प्रभारी प्रधानाध्यापिका बीना वर्मा पर मारपीट और दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया है। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप से मामला और जटिल हो गया है।
बीएसए ने दिए जांच के आदेश
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) विजय प्रताप सिंह ने खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) सुरसा को इस प्रकरण की जांच करने का आदेश दिया है। उन्होंने निर्देश दिया है कि तीन दिन के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
“मामला संज्ञान में आया है। खंड शिक्षा अधिकारी को जांच अधिकारी बनाया गया है। तीन दिन में आख्या देने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
– विजय प्रताप सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी
शिक्षा विभाग में हड़कंप, कार्रवाई पर नजर
विद्यालय में शिक्षकों के बीच इस तरह के विवाद से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। शिक्षकों का यह व्यवहार विद्यार्थियों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में बीएसए द्वारा की जा रही जांच और उसके परिणाम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
क्या होगा आगे?
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि खंड शिक्षा अधिकारी की जांच रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकलता है। यदि किसी भी पक्ष की गलती पाई जाती है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
निष्कर्ष
शिक्षण संस्थानों में अनुशासन और शिष्टाचार बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में विद्यालयों में इस तरह की घटनाएं शिक्षा प्रणाली की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं। शिक्षा विभाग को चाहिए कि वह जल्द से जल्द निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई करे ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।
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