इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बड़ा बदलाव: स्नातक अब चार वर्षीय होगा, शिक्षक और कर्मचारी नियुक्तियों को मंजूरी

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बड़ा बदलाव: स्नातक अब चार वर्षीय होगा, शिक्षक और कर्मचारी नियुक्तियों को मंजूरी

इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में शैक्षिक सत्र 2025-26 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। यह निर्णय कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव की अध्यक्षता में कार्य परिषद की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया।


चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम की तैयारी

पीआरओ प्रो. जया कपूर ने बताया कि नई शिक्षा व्यवस्था के तहत पाठ्यक्रम और मूल्यांकन (Evaluation) पैटर्न को तैयार कर लिया गया है। इसे जल्द ही विद्वत परिषद (Academic Council) की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

➡️ चार वर्षीय डिग्री कोर्स के लाभ:
✔ छात्रों को मल्टीपल एंट्री और एग्जिट ऑप्शन मिलेगा।
शोध और इंटर्नशिप के अधिक अवसर।
✔ वैश्विक मानकों के अनुरूप उच्च शिक्षा का अवसर।


शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति को मंजूरी

गणित विभाग में पांच सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति को स्वीकृति दी गई। चयनित नाम इस प्रकार हैं:
1️⃣ हरेंद्र सिंह
2️⃣ स्वराज पॉल
3️⃣ सचिन पाठक
4️⃣ राजकुमार मौर्य
5️⃣ मनीकांदन एस

➡️ सहायक प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर पदोन्नति:
डॉ. अविनाश कुमार चतुर्वेदी
डॉ. सपना देवी

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➡️ डिप्टी रजिस्ट्रार पद पर नियुक्ति:
देवेश गोस्वामी


गैर-शिक्षक कर्मचारियों की नियुक्ति

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 98 एमटीएस (MTS) और 39 स्किल्ड एमटीएस पदों पर नियुक्ति को मंजूरी दी गई।

📌 कुलपति के कार्यकाल में अब तक:
360 शिक्षकों की भर्ती पूरी हो चुकी है।
गैर-शिक्षक स्टाफ सहित कुल 1100 नियुक्तियां
नए पदों के विज्ञापन जारी करने का रास्ता साफ।


नई पेंशन योजना के तहत ग्रेच्युटी

कार्य परिषद ने यह भी फैसला लिया कि नई पेंशन योजना के अंतर्गत आने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों को भी ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा।


शिक्षकों की परिवीक्षा अवधि घटाई गई

अब से विश्वविद्यालय में नियुक्त शिक्षकों की परिवीक्षा अवधि (Probation Period) को दो वर्ष से घटाकर एक वर्ष कर दिया गया है।


अर्थशास्त्र विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर की सेवा समाप्त

इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने अर्थशास्त्र विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दीपशिखा सोनकर की सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया।

➡️ कारण:
✔ मैटरनिटी लीव समाप्त होने के बाद दो साल तक बिना सूचना अनुपस्थित रहना।
✔ विश्वविद्यालय की छवि धूमिल करने के आरोप।
बार-बार नोटिस देने के बावजूद संतोषजनक उत्तर न देना

➡️ महत्वपूर्ण निर्णय:
ऑर्डिनेंस क्लॉज 8 (बी) के तहत सर्वसम्मति से सेवाएं समाप्त करने का निर्णय
अतिरिक्त दो सप्ताह का समय जवाब देने के लिए दिया गया।


निष्कर्ष

इलाहाबाद विश्वविद्यालय का यह निर्णय शिक्षा प्रणाली को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम छात्रों के लिए अधिक अवसर खोलेगा, वहीं शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति से शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार आएगा। साथ ही, अनुशासनहीनता और अकादमिक नियमों की अनदेखी करने वालों पर सख्त कार्रवाई विश्वविद्यालय की प्रशासनिक सख्ती को दर्शाता है।

➡️ अब देखना होगा कि ये बदलाव विश्वविद्यालय के शैक्षिक स्तर को किस हद तक प्रभावित करते हैं।


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