बिगड़ती जीवनशैली: बच्चों में आक्रामक हो रही टाइप-2 डायबिटीज
कानपुर: पहले **40 साल की उम्र के बाद** होने वाली **टाइप-2 डायबिटीज** अब **10 साल के बच्चों** को भी अपनी चपेट में ले रही है। **मोटापा, फास्ट फूड का अधिक सेवन और शारीरिक व्यायाम की कमी** इसकी प्रमुख वजहें हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि **बच्चों में यह बीमारी बेहद आक्रामक रूप ले रही है**, और कम समय में ही **इंसुलिन की जरूरत** पड़ रही है।
डायबिटीज के बढ़ते मामले
शहर में **100 से अधिक बच्चे डायबिटीज विशेषज्ञों के पास पंजीकृत हैं**। **सबसे कम उम्र का मरीज मात्र 9.5 साल का** है। **पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. अनुराग वाजपेयी** के अनुसार, **मोटापे से ग्रस्त बच्चों** में यह समस्या ज्यादा देखी जा रही है। बच्चों ने **खेलना-कूदना बंद कर दिया** है और **स्क्रीन टाइम** बढ़ गया है, जिससे **शरीर में वसा का जमाव** बढ़ने लगा है।
अध्ययन में मिले चौंकाने वाले तथ्य
**9.5 से 17 साल के 100 किशोरों** पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि:
- 🔹 **इंसुलिन प्रतिरोध (Insulin Resistance) बढ़ रहा है।**
- 🔹 **ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा हुआ मिला।**
- 🔹 **धमनियों में ब्लॉकेज होने की संभावना बढ़ गई।**
- 🔹 **कम उम्र में ही हार्ट अटैक का खतरा बढ़ गया।**
- 🔹 **डायबिटिक बच्चों का लिवर फैटी पाया गया।**
बच्चों में डायबिटीज क्यों हो रही आक्रामक?
विशेषज्ञों का कहना है कि **10 से 17 वर्ष की उम्र में हार्मोनल बदलाव** होने के कारण **पैंक्रियाज को अधिक मेहनत करनी पड़ती है**। **इंसुलिन प्रतिरोध** की समस्या बढ़ने से दवाओं की **खुराक तेजी से बढ़ानी पड़ती है**।
**”बच्चों को दो साल में दो से तीन टेबलेट पर रखना पड़ता है और तीन साल में उन्हें इंसुलिन की जरूरत पड़ सकती है।”** – डॉ. अनुराग वाजपेयी
बचाव के उपाय
बच्चों को टाइप-2 डायबिटीज से बचाने के लिए जरूरी है कि वे **स्वस्थ जीवनशैली** अपनाएं।
- ✅ **फास्ट फूड जैसे पिज्जा, बर्गर, नूडल्स का सेवन कम करें।**
- ✅ **लैपटॉप, मोबाइल और टीवी का इस्तेमाल 1 घंटे से ज्यादा न करें।**
- ✅ **मोटा अनाज, हरी सब्जियां, मौसमी फल और रोटी का सेवन बढ़ाएं।**
- ✅ **रोजाना व्यायाम करें और खुले मैदान में खेलें।**
- ✅ **नियमित हेल्थ चेकअप कराएं और ब्लड शुगर की निगरानी करें।**
निष्कर्ष
बदलती जीवनशैली और **अनियमित खानपान** के कारण **बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज तेजी से बढ़ रही है**। समय रहते **सही आदतें** अपनाने से इस गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है। माता-पिता को चाहिए कि वे **बच्चों को संतुलित आहार और शारीरिक गतिविधियों के प्रति जागरूक करें**।
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