⚖️ सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: नर्सरी और प्राथमिक स्कूल सिर्फ मान्य भवनों में चलाए जाएं
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में नर्सरी और प्राथमिक स्कूलों के संचालन को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये स्कूल स्थानीय निर्माण उपनियमों के तहत मान्य भवनों में ही संचालित किए जाएं, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
📢 सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया। कोर्ट ने कहा कि सभी नर्सरी और प्राथमिक स्कूलों को निर्माण उपनियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
🔍 मामले की पृष्ठभूमि
- CBSE ने 13 अप्रैल 2009 को जारी दिशा-निर्देशों पर स्पष्टीकरण मांगा था।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्कूलों को ऐसे भवनों में संचालित करना चाहिए जो स्थानीय निर्माण नियमों के अनुसार हों।
- निर्देशों में यह भी कहा गया कि स्कूलों में बहुमंजिला इमारतों की संख्या को सीमित किया जाए।
🏗️ भवन निर्माण से जुड़े नए निर्देश
CBSE ने अपने निर्देशों में कहा कि स्कूलों के भवन ऐसे होने चाहिए जो छात्रों की सुरक्षा के लिए उपयुक्त हों।
📌 मुख्य निर्देश:
- स्कूलों को केवल स्थानीय नियमों के तहत स्वीकृत भवनों में चलाया जाए।
- बहुमंजिला स्कूल भवनों की संख्या सीमित की जाए।
- बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए।
🏫 स्कूल भवनों के लिए CBSE के नए मानक
CBSE ने कहा कि स्कूलों को राष्ट्रीय भवन संहिता 2016 के अनुसार डिजाइन किया जाना चाहिए। इस कोड के तहत:
- स्कूल की इमारतें एक या दो मंजिला होनी चाहिए।
- बहुमंजिला स्कूल भवनों को विशेष अनुमति की आवश्यकता होगी।
- बिल्डिंग में आग और भूकंप सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होगा।
🚧 सरकार का रुख
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सभी राज्य सरकारों को इन नए निर्देशों का पालन करना होगा। कोर्ट ने कहा कि राज्यों को अपने निर्माण नियमों की समीक्षा करनी चाहिए ताकि भविष्य में स्कूल भवनों से जुड़े किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।
🔎 निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दिया गया है। इस फैसले से सभी स्कूलों को अपने बिल्डिंग स्ट्रक्चर को मानकों के अनुरूप बनाना होगा और सरकार को भी सुनिश्चित करना होगा कि सभी नर्सरी और प्राथमिक स्कूल स्थानीय निर्माण उपनियमों के तहत ही संचालित हों।
स्रोत: सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई रिपोर्ट।
