मौद्रिक नीति वक्तव्य 2024-25: आरबीआई की बड़ी घोषणा
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 5 से 7 फरवरी 2025 तक अपनी 53वीं बैठक आयोजित की। इस बैठक में रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट घटाकर 6.25% करने का निर्णय लिया गया।
मुख्य निर्णय
- रेपो रेट घटाकर 6.25% किया गया।
- स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 6.00% और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) व बैंक रेट 6.50% किया गया।
- मुद्रास्फीति को लक्ष्य सीमा में बनाए रखने के साथ आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने पर जोर दिया गया।
आर्थिक परिदृश्य और जीडीपी पूर्वानुमान
वैश्विक अर्थव्यवस्था औसत से नीचे बढ़ रही है, लेकिन उच्च आवृत्ति संकेतक निरंतर विस्तार दर्शाते हैं। भारत में वित्त वर्ष 2024-25 के लिए जीडीपी वृद्धि 6.4% रहने का अनुमान है, जिसमें निजी खपत और सेवा क्षेत्र की प्रमुख भूमिका होगी।
वित्त वर्ष 2025-26 में घरेलू खपत को आयकर में रियायतें और पूंजीगत व्यय से समर्थन मिलेगा। रियल जीडीपी वृद्धि 6.7% रहने का अनुमान है:
- Q1: 6.7%
- Q2: 7.0%
- Q3 और Q4: 6.5%
मुद्रास्फीति की स्थिति
अक्टूबर 2024 में 6.2% पर पहुंचने के बाद, नवंबर-दिसंबर में मुख्य मुद्रास्फीति में गिरावट आई। सब्जी और खाद्य पदार्थों की कीमतों में नरमी से यह गिरावट आई।
फरवरी 2025 तक मुद्रास्फीति 4.8% रहने का अनुमान है और 2025-26 के लिए 4.2% अनुमानित है:
- Q1: 4.5%
- Q2: 4.0%
- Q3: 3.8%
- Q4: 4.2%
मौद्रिक नीति के पीछे तर्क
MPC ने मुद्रास्फीति में गिरावट को ध्यान में रखते हुए नीतिगत दरों में कटौती का फैसला किया है। हालांकि, वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और व्यापार नीतियों में अनिश्चितता को देखते हुए तटस्थ नीति रुख बनाए रखा गया है।
अगली बैठक
आरबीआई की अगली मौद्रिक नीति बैठक 7 से 9 अप्रैल 2025 को आयोजित की जाएगी, जिसमें आगे की आर्थिक दिशा पर चर्चा होगी।
निष्कर्ष
आरबीआई का यह निर्णय आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और मुद्रास्फीति को लक्ष्य सीमा में बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। मौद्रिक नीति में यह बदलाव बैंकिंग प्रणाली, ऋण बाजार और निवेशकों के लिए अहम साबित हो सकता है।
