
📚 शिक्षकों की मेहनत को सलाम – एक सच्ची श्रद्धांजलि
जब “सैलरी ट्र क्रेडिटेड इन एकाउंट” का मैसेज शिक्षक ग्रुपों में आता है, तो यह सिर्फ एक वेतन सूचना नहीं होती, बल्कि यह एक नई ऊर्जा, एक नई प्रेरणा का संचार करता है। यह संदेश शिक्षकों को यह एहसास दिलाता है कि उनकी कड़ी मेहनत का कुछ तो प्रतिफल उन्हें मिला। लेकिन क्या यह मेहनत के बराबर है? शायद नहीं।
👨🏫 शिक्षक – एक अद्वितीय समर्पण
सुबह 4 बजे उठकर, 9 बजे तक स्कूल पहुँचना, दिनभर विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देना, प्रशासनिक कार्यों से जूझना, और फिर शाम को 3 बजे लौटकर अगले दिन की योजना बनाना – यह केवल एक सच्चा शिक्षक ही कर सकता है।
शिक्षक केवल पढ़ाने का काम नहीं करते, बल्कि वे नए भारत की नींव तैयार कर रहे होते हैं। उनका हर दिन विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य की दिशा में बढ़ता एक कदम होता है।
💡 शिक्षा का योगदान – शत-प्रतिशत साक्षरता की ओर
यदि शिक्षकों की यह प्रतिबद्धता और समर्पण इसी तरह बना रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत शत-प्रतिशत साक्षरता का लक्ष्य प्राप्त कर लेगा।
शिक्षक न केवल विषय पढ़ाते हैं, बल्कि वे जीवन के वास्तविक पाठ भी सिखाते हैं। वे विद्यार्थियों को ज्ञान देने के साथ-साथ संस्कार, नैतिकता, और अनुशासन का पाठ पढ़ाते हैं।
🎓 शिक्षक बनना या बेसिक शिक्षा अधिकारी?
1999 में विशिष्ट बीटीसी में एक शिक्षक के रूप में चयनित न हो पाने के कारण मैं बेसिक शिक्षा अधिकारी बना। जीवन भर यह सोचता रहा कि मैं शिक्षक क्यों नहीं बन पाया। लेकिन अब जब मैं शिक्षकों की कठिन मेहनत देखता हूँ, तो लगता है कि शायद मैंने सही निर्णय लिया।
शिक्षकों के कार्य और समर्पण को देखकर मुझे यह महसूस होता है कि उनकी मेहनत के आगे मेरा काम बहुत आसान है। मैं कोशिश करता हूँ कि मैं भी अधिक से अधिक कार्य करूँ, लेकिन यह सच है कि शिक्षक का परिश्रम अतुलनीय है।
🙏 जय हिंद, जय शिक्षक!
शिक्षकों की मेहनत को शब्दों में बयान करना आसान नहीं है। वे भारत के भविष्य को गढ़ रहे हैं, नई पीढ़ी को दिशा दे रहे हैं।
मैं हृदय से देश के सभी शिक्षकों को सलाम करता हूँ और आशा करता हूँ कि वे इसी समर्पण और ऊर्जा के साथ कार्य करते रहेंगे।
शिक्षक का सम्मान ही देश का सम्मान है।
