माध्यमिक स्कूलों में महंगी होगी पढ़ाई
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने वर्तमान महंगाई दर के आधार पर
विद्यालयों में विद्यार्थियों से लिए जाने वाले सभी शुल्क में वृद्धि करने का फैसला किया है।
इस प्रस्ताव को शासन को भेजा गया है और मंजूरी मिलने के बाद शुल्क में
वृद्धि लागू की जाएगी।
सभी मदों का बढ़ेगा शुल्क
माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में वर्ष 2010 के बाद से शुल्क में कोई वृद्धि नहीं की गई है।
इस समय परीक्षा शुल्क केवल 25 रुपये प्रति छात्र और विद्युत शुल्क
20 रुपये प्रति छात्र है। अन्य शुल्क भी 10 से 20 रुपये के बीच हैं।
लेकिन, पिछले 14 वर्षों में बढ़ती महंगाई ने स्कूलों के बजट को बुरी तरह से प्रभावित किया है।
अब विभाग ने इन सभी मदों में शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है।
बढ़ती महंगाई ने स्कूलों के बजट पर डाला असर
स्कूल प्रशासन का कहना है कि महंगाई के कारण उनके खर्चे लगातार बढ़ रहे हैं,
लेकिन शुल्क दरें पुरानी होने के कारण स्कूलों का बजट संभालना मुश्किल हो रहा है।
इस वजह से स्कूलों ने शुल्क में वृद्धि की मांग की है, ताकि प्रशासनिक और शैक्षणिक
कार्य सुचारू रूप से चल सके।
शासन स्तर पर बनी सहमति
माध्यमिक विद्यालयों में शुल्क बढ़ाने को लेकर शासन ने
पांच बैठकें की हैं। इन बैठकों में शुल्क वृद्धि पर सहमति बन चुकी है।
सूत्रों के अनुसार, माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर
मुख्यमंत्री सचिवालय को भेज दिया है।
जल्द ही इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
प्रधानाध्यापकों ने किया विरोध
प्रदेश भर के हजारों प्रधानाध्यापक कई बार माध्यमिक शिक्षा निदेशक
का घेराव कर चुके हैं और शुल्क बढ़ाने की मांग कर चुके हैं। उनका कहना है कि
वर्तमान शुल्क दरों पर स्कूलों को चलाना बेहद कठिन हो चुका है।
अब शासन से इस प्रस्ताव पर तत्काल निर्णय लेने की अपेक्षा की जा रही है।
