कोर्ट का फैसला: शिक्षकों को मिली राहत, पदोन्नति कायम









कोर्ट का फैसला: शिक्षकों को मिली राहत, पदोन्नति कायम

कोर्ट का फैसला: शिक्षकों को मिली राहत, पदोन्नति कायम

शिक्षकों को बड़ी राहत

वर्ष 2015 में प्रधानाध्यापक के पदों पर पदोन्नति प्राप्त शिक्षकों को प्रयागराज हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा सचिव और बीएसए द्वारा जारी उन आदेशों को निरस्त कर दिया है, जिसमें शिक्षकों को उनके मूल विद्यालय में ज्वाइन करने का निर्देश दिया गया था। अब शिक्षक अपने पदोन्नति प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत रह सकेंगे।

फैसले से शिक्षकों में खुशी का माहौल

कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद शिक्षकों में खुशी का माहौल है। शिक्षक नेता सुरेंद्र यादव और आदित्य कुमार ने बताया कि यह फैसला शिक्षकों के हित में है। उन्होंने कहा, “यह न्यायालय का शिक्षकों के लिए सकारात्मक कदम है।”

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पदोन्नति आदेश क्यों हुआ निरस्त?

गत माह, 9 दिसंबर 2024 को बेसिक शिक्षा सचिव ने एक आदेश जारी किया था, जिसमें 2015 की पदोन्नति को निरस्त करते हुए शिक्षकों को उनके मूल विद्यालय में लौटने के निर्देश दिए गए थे। इसके क्रम में 10 दिसंबर 2024 को बीएसए ने भी इसी प्रकार का आदेश जारी किया था।

इन आदेशों के खिलाफ शिक्षकों ने प्रयागराज हाईकोर्ट में रिट दाखिल की। न्यायालय ने 17 जनवरी को दोनों आदेशों को स्थगित कर दिया और 22 जनवरी को उन्हें पूरी तरह निरस्त कर दिया।

बीएसए ने क्या कहा?

बीएसए डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय ने कहा कि कोर्ट के आदेशों का पालन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विभाग को कोर्ट से जैसे ही आदेश प्राप्त होंगे, उसी के अनुरूप कार्यवाही की जाएगी।

शिक्षकों ने किया फैसले का स्वागत

शिक्षकों ने कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे उनके अधिकारों की जीत बताया है। यह फैसला न केवल शिक्षकों के हित में है, बल्कि न्याय प्रणाली में उनकी आस्था को भी मजबूत करता है।

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