विद्यालयों की मान्यता ऑनलाइन, फिर भी 586 प्रकरण लंबित
उत्तर प्रदेश में अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों की नई मान्यता की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है। इसके बावजूद खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) की लापरवाही के कारण 586 प्रकरण लंबित हैं। इन मामलों का निस्तारण 10 दिन में होना चाहिए था, लेकिन विभागीय स्तर पर देरी जारी है।
70 जिलों के बीएसए को नोटिस जारी
बेसिक शिक्षा विभाग ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए 70 जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को नोटिस जारी किया है। इन जिलों में फर्रुखाबाद, बुलंदशहर, चित्रकूट, अमरोहा और उन्नाव को छोड़कर शेष जिलों में मान्यता के प्रकरण लंबित पाए गए हैं।
मान्यता प्रक्रिया में देरी का कारण
बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार, कई जिलों में मान्यता संबंधी मामलों को 2-2 महीने तक लंबित रखा जा रहा है, जबकि जनहित गारंटी अधिनियम के तहत इन्हें 10 दिन में निस्तारित किया जाना अनिवार्य है।
क्या कहा अपर शिक्षा निदेशक ने?
अपर शिक्षा निदेशक बेसिक गणेश कुमार ने इस मामले में 70 जिलों के बीएसए को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि:
- संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों से तीन दिन में स्पष्टीकरण लिया जाए।
- स्पष्टीकरण न मिलने की स्थिति में कार्यवाही की जाएगी।
- नए सत्र में समयबद्ध मान्यता प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
प्रदेश में मान्यता की ऑनलाइन प्रक्रिया
उत्तर प्रदेश सरकार ने विद्यालयों की मान्यता प्रक्रिया को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से लागू किया है, जिससे:
- आवेदनों का तेजी से निस्तारण हो सके।
- मान्यता संबंधी पारदर्शिता बनी रहे।
- विद्यालयों को समय पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
नए सत्र के लिए विभाग की योजना
बेसिक शिक्षा विभाग ने यह सुनिश्चित किया है कि आगामी शैक्षणिक सत्र से पहले सभी लंबित मामलों का निस्तारण कर दिया जाए। साथ ही, ऑनलाइन प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश में विद्यालय मान्यता को ऑनलाइन करने के बावजूद अधिकारियों की लापरवाही से 586 प्रकरण अभी भी लंबित हैं। सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उम्मीद है कि जल्द ही विद्यालयों को सुचारू रूप से मान्यता मिल सकेगी।
अधिक जानकारी के लिए बेसिक शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करें।
