सत्र बीतने को, 80% बच्चों के पास अब तक नहीं है अपार आईडी
लखनऊ। सरकारी और निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले 80% बच्चों की ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (अपार) आईडी अब तक नहीं बन पाई है। यह आईडी बच्चों के लिए शैक्षिक और भविष्य की योजनाओं में कई तरह से मददगार है। सत्र 2024-25 समाप्त होने को है, लेकिन स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों की लापरवाही के कारण छात्रों को इस सुविधा से वंचित होना पड़ रहा है।
क्या है अपार आईडी और क्यों है जरूरी?
अपार आईडी छात्रों का एक डिजिटल पहचान पत्र है, जिसमें 12 अंकों का एक कोड होता है। इसके माध्यम से छात्रों की शैक्षणिक जानकारी जैसे स्कोर कार्ड, मार्कशीट, ग्रेडशीट, डिग्री और सह-पाठ्यचर्या उपलब्धियों का रिकॉर्ड रखा जाता है। यह आईडी डिजिटल इंडिया अभियान का हिस्सा है और छात्रों को कई क्षेत्रों में लाभ पहुंचाती है।
अभी तक क्यों नहीं बनी 80% बच्चों की आईडी?
जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय के अनुसार, स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों की लापरवाही मुख्य कारण है। कई स्कूल अब भी इस प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। प्राइमरी और जूनियर विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों का कहना है कि अभिभावक इस काम में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
डीआईओएस कार्यालय ने अपार आईडी न बनाने वाले स्कूल प्रबंधकों पर सख्ती की है। बुधवार को एक दर्जन स्कूल प्रबंधकों को लौटा दिया गया और निर्देश दिए गए कि वे जल्द से जल्द छात्रों की अपार आईडी बनवाएं। वहीं, बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) राम प्रवेश ने निर्देश दिए हैं कि हर विद्यालय में कैंप लगाकर अपार आईडी बनाने की प्रक्रिया पूरी की जाए।
अपार आईडी के फायदे
- स्कॉलरशिप: छात्रों को शिक्षा ऋण और स्कॉलरशिप पाने में आसानी होगी।
- नौकरी: नौकरी के लिए आवेदन करते समय यह पहचान पत्र मान्य होगा।
- स्कूल बदलने में सहूलियत: किसी भी राज्य में स्कूल बदलने पर रिकॉर्ड ट्रांसफर में सुविधा।
- फर्जीवाड़ा रोकेगा: शैक्षणिक अभिलेखों में फर्जीवाड़े की संभावना समाप्त होगी।
- सभी राज्यों में मान्यता: यह कार्ड पूरे भारत में मान्य है।
डीआईओएस की चेतावनी
जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार ने कहा, “सभी स्कूलों और कॉलेजों को बच्चों की अपार आईडी बनवानी है। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अपार आईडी न बनने से बच्चों का नुकसान होगा।”
