चंद्रमा पहली बार सांस्कृतिक धरोहरों की सूची में शामिल
न्यूयॉर्क, एजेंसी: दुनियाभर के देश चंद्रमा के रहस्यों से पर्दा उठाने के लिए नए-नए मिशन भेज रहे हैं। इससे अंतरिक्ष में बढ़ती गतिविधियों से चांद को नुकसान पहुंचने की आशंका है। ऐसे में पहली बार चंद्रमा को विश्व स्मारक कोष (डब्ल्यूएमएफ) ने सांस्कृतिक धरोहरों की सूची में शामिल किया है। चांद को 25 खतरे में पड़ी विरासत स्थलों की सूची में रखा गया है।
इसलिए चांद को किया शामिल
डब्ल्यूएमएफ ने वॉचलिस्ट में चांद को इसलिए जोड़ा है, क्योंकि यह मानवता के नए अंतरिक्ष युग और चंद्रमा पर बढ़ती गतिविधियों का साक्षी है। यहां बढ़ती मानव और रोबोटिक गतिविधियां सबसे बड़ा खतरा हैं। नासा का आर्टेमिस प्रोग्राम चांद पर एक स्थायी बेस बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इससे सुरक्षा प्रोटोकॉल की कमी के चलते चंद्रमा के ऐतिहासिक स्थलों को नुकसान हो सकता है।
निशान को संरक्षित करना जरूरी
डब्ल्यूएमएफ के अध्यक्ष और सीईओ बेनेडिक्ट डी मोटलौर ने कहा कि चांद पर बढ़ रही वैज्ञानिक और व्यावसायिक गतिविधियां उसकी धरोहर के लिए गंभीर चुनौती हैं। यदि संरक्षण के उचित उपाय नहीं किए गए, तो यह हमारे इतिहास और मानवता की सबसे बड़ी उपलब्धि के निशान खोने का कारण बन सकता है।
चांद पर ट्रैक्विलिटी बेस सबसे महत्वपूर्ण
अभी चांद पर 90 से अधिक ऐतिहासिक स्थलों की मेजबानी की जा रही है, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण ट्रैक्विलिटी बेस है। यही वह जगह है, जहां नील आर्मस्ट्रांग ने 1969 में अपोलो 11 मिशन के दौरान पहला कदम रखा था। यहां पर आर्मस्ट्रांग के बूट प्रिंट संरक्षित हैं और 100 से अधिक अन्य ऐतिहासिक वस्तुएं भी मौजूद हैं। इसमें कैमरा, स्मारक डिस्क और अपोलो 11 से जुड़ी कई अन्य कलाकृतियां भी शामिल हैं।
हैदराबाद और भुज के स्थल भी शामिल
सूची में संगठन ने हैदराबाद में स्थित ऐतिहासिक मूसी रिवरफ्रंट की इमारत और गुजरात के भुज में मौजूद ऐतिहासिक हमीरसर झील को भी शामिल किया है। यह ऐतिहासिक स्थल जलसंकट और जलवायु परिवर्तन के कारण जोखिम का सामना कर रहे हैं। वहीं गाजा का ऐतिहासिक ढांचा, कीव का टीचर हाउस समेत पर्यटन और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित अन्य स्थान भी शामिल हैं।
हर दो साल में होती है घोषणाः
डब्ल्यूएमएफ ने 1996 में वॉचलिस्ट शुरू की थी। इसकी घोषणा हर दो साल में की जाती है। इसने लगभग 350 साइटों की सुरक्षा के लिए 120 अरब डॉलर से अधिक का योगदान दिया है। वहीं साइटों को 300 अरब डॉलर का भी समर्थन भी मिल चुका है।
