दूसरे सत्र की परीक्षा 25 से: गणतंत्र दिवस पर पुरस्कार और सवाल









दूसरे सत्र की परीक्षा 25 से: गणतंत्र दिवस पर पुरस्कार और सवाल

दूसरे सत्र की परीक्षा 25 जनवरी से: गणतंत्र दिवस पर विजेताओं को मिलेगा सम्मान

द्वितीय सत्र की परीक्षा का कार्यक्रम

**परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों** में द्वितीय सत्र की परीक्षा 25 जनवरी से शुरू होकर 30 जनवरी तक चलेगी। इस परीक्षा में 10-10 अंकों का टेस्ट लिया जाएगा। परीक्षा की कापियां अभिभावकों को दिखाने का प्रावधान है। दिसंबर तक पढ़ाए गए पाठ्यक्रम के आधार पर यह परीक्षा आयोजित होगी।

राज्य के 1.33 लाख स्कूलों में 1.54 करोड़ छात्र इस परीक्षा में शामिल होंगे।

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तीसरी परीक्षा पर उठे सवाल

बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने परीक्षा को सख्ती से आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, यह तीन महीने में तीसरी परीक्षा होगी, जिससे शिक्षकों और छात्रों के बीच कोर्स पूरा करने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

**नवंबर से अब तक परीक्षा कार्यक्रम**:

  • नवंबर-अंत से दिसंबर-अंत: प्रथम सत्रीय परीक्षा
  • दिसंबर तीसरे सप्ताह: अर्द्धवार्षिक परीक्षा
  • 25 जनवरी से: द्वितीय सत्रीय परीक्षा

गणतंत्र दिवस पर कविता पाठ प्रतियोगिता

**कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों** के लिए कविता पाठ प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। गणतंत्र दिवस के अवसर पर राज्य स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले 10 छात्रों को पुरस्कृत किया जाएगा।

प्रतियोगिता का आयोजन

  • 17-18 जनवरी: विद्यालय स्तर पर प्रतियोगिता
  • 21 जनवरी: बीईओ द्वारा सर्वश्रेष्ठ छात्र का चयन
  • 22-23 जनवरी: जिला स्तर पर चयन
  • राज्य स्तर पर 10 सर्वश्रेष्ठ छात्रों का चयन

पुरस्कार वितरण

राज्य स्तर पर:

  • प्रथम स्थान: ₹5,000
  • द्वितीय स्थान: ₹4,000
  • तृतीय स्थान: ₹3,000
  • अन्य सात छात्रों को ₹2,100 प्रत्येक

जिला स्तर पर:

  • प्रथम स्थान: ₹2,100
  • द्वितीय स्थान: ₹1,500
  • तृतीय स्थान: ₹1,100

शिक्षकों और अभिभावकों की चिंता

उप्र बीटीसी शिक्षक संघ के अध्यक्ष अनिल यादव ने परीक्षा के लगातार आयोजन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “साल भर में हर विषय के लिए 100 अंकों में मूल्यांकन किया जाता है। लगातार परीक्षाओं के कारण कोर्स पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।”

दूसरे सत्र की परीक्षा और गणतंत्र दिवस पर आयोजित प्रतियोगिताएं छात्रों के लिए प्रगति के नए द्वार खोलेंगी, लेकिन लगातार परीक्षाओं से शैक्षणिक संतुलन बनाए रखना जरूरी है।


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