एचएमपीवी वायरस: बचाव, सतर्कता और इलाज
क्या है एचएमपीवी?
एचएमपीवी (ह्यूमन मेटान्यूमो वायरस) एक श्वसन संक्रमण फैलाने वाला वायरस है। इसे पहली बार 2001 में खोजा गया था। यह वायरस सर्दी, खांसी, बुखार जैसे लक्षण पैदा करता है और गंभीर मामलों में निमोनिया या ब्रॉन्कियोलाइटिस जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है।
लक्षण
- खांसी
- सर्दी-जुकाम
- तेज बुखार (103°F से अधिक)
- सांस लेने में दिक्कत
- गले में खराश
- नाक बहना
- होठों और नाखूनों का पीला पड़ना
यदि ये लक्षण गंभीर हो जाएं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
कैसे फैलता है एचएमपीवी?
यह वायरस संक्रमित व्यक्ति की खांसी या छींक से निकलने वाली बूंदों, दूषित सतहों को छूने या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है।
बचाव के उपाय
- साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोएं।
- खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकें।
- बीमार व्यक्तियों के संपर्क में आने से बचें।
- टिश्यू या रुमाल का दोबारा इस्तेमाल न करें।
- तौलिये और अन्य निजी वस्त्र साझा करने से बचें।
- मास्क पहनें और बार-बार छुई जाने वाली सतहों को साफ रखें।
इलाज
एचएमपीवी के लिए फिलहाल कोई विशेष दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए आराम, पानी पीना, और सामान्य बुखार की दवाएं उपयोगी हो सकती हैं। गंभीर मामलों में, ऑक्सीजन थेरेपी या वेंटिलेशन की आवश्यकता हो सकती है।
एचएमपीवी बनाम कोविड-19
हालांकि दोनों ही श्वसन संक्रमण फैलाने वाले वायरस हैं, लेकिन एचएमपीवी कोविड-19 जितना खतरनाक नहीं है। कोविड-19 के लिए वैक्सीन उपलब्ध है, जबकि एचएमपीवी के लिए नहीं।
आरटी-पीसीआर टेस्ट से पहचान
एचएमपीवी का पता लगाने के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट किया जाता है। यह टेस्ट तेजी से नतीजे देने वाले एंटीजन डिटेक्शन टेस्ट से भी किया जा सकता है।
भारत में स्थिति
भारत में इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (आईडीएसपी) और आईसीएमआर इस वायरस की निगरानी कर रहे हैं। हाल के अध्ययनों के अनुसार, गोरखपुर, चेन्नई और लखनऊ में 3-5% नमूनों में एचएमपीवी संक्रमण की पुष्टि हुई है।
अंतरराष्ट्रीय स्थिति
अमेरिका में श्वसन संक्रमण के 10% मामलों में एचएमपीवी संक्रमण पाया गया है। वहीं भारत में यह आंकड़ा 5% तक सीमित है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इस वायरस की निगरानी और स्थिति का आकलन कर रहा है।
