अलग-अलग विषय में यूजी-पीजी तो भी बन सकेंगे शिक्षक









यूजीसी शिक्षक भर्ती नियमों में बदलाव

**यूजीसी नेट और पीएचडी वाले विषयों के आधार पर अब शिक्षक बन सकेंगे**

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत शिक्षक बनने की प्रक्रिया में लचीलापन

**शिक्षक बनने के नियमों में बदलाव**

अब यूजीसी नेट या पीएचडी वाले विषयों के आधार पर विश्वविद्यालयों में शिक्षक बनने का रास्ता खुल गया है। पहले यह जरूरी था कि स्नातक (यूजी), स्नातकोत्तर (पीजी) और पीएचडी एक ही विषय में हो। लेकिन नई नीति के तहत यह प्रतिबंध हटा दिया गया है, जिससे बहु-विषयक शिक्षण को प्रोत्साहन मिलेगा।

WhatsApp Channel Join Now
WhatsApp Group Join Now
Telegram Channel Join Now

**प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस: एक नई पहल**

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की अवधारणा पेश की गई है। इसके तहत उद्योग या अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञ उच्च शिक्षण संस्थानों में 10 फीसदी सीटों पर तीन साल तक सेवाएं दे सकते हैं। यह पहल छात्रों को उद्योग से जुड़े दिग्गजों का मार्गदर्शन देने में मदद करेगी।

**एपीआई हटाया गया, नवाचार पर जोर**

नई भर्ती नियमों में अकादमिक प्रदर्शन संकेतक (एपीआई) को हटा दिया गया है। अब शिक्षक बनने के लिए नवाचार, प्रौद्योगिकी विकास, उद्यमशीलता, सामुदायिक जुड़ाव, सामाजिक योगदान, पुस्तक लेखन और डिजिटल शिक्षण संसाधनों के विकास जैसे क्षेत्रों का समग्र मूल्यांकन किया जाएगा।

**कलाओं और खेलों में विशेष प्रोत्साहन**

नई नीति के तहत योग, संगीत, प्रदर्शन कला, दृश्य कला, मूर्तिकला, और नाटक जैसे क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए विशेष भर्ती का रास्ता खोला गया है। साथ ही, पैराओलंपिक समेत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के प्रतिभागियों और अवॉर्डी को प्राथमिकता दी जाएगी।

**भारतीय भाषाओं पर जोर**

यूजीसी अध्यक्ष प्रोफेसर एम. जगदीश कुमार ने बताया कि नई नियमावली के तहत पुस्तकों, शोध पत्रों और शैक्षणिक प्रकाशनों में भारतीय भाषाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। यह पहल भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा सामग्री को बढ़ावा देने के लिए की गई है।

**यूजीसी रेगुलेशन 2025 का उद्देश्य**

यूजीसी रेगुलेशन 2025 का उद्देश्य भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों में भर्ती प्रक्रिया में लचीलापन, समावेशिता और उत्कृष्टता लाना है। अब शिक्षक बनने के लिए स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्रियां अलग-अलग विषयों में हो सकती हैं, जिससे छात्रों और शिक्षकों के लिए बहु-विषयक पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होगा।

यह लेख Shubham Patel द्वारा प्रस्तुत। उच्च शिक्षा और शिक्षक भर्ती के बारे में ताजा खबरों के लिए हमारी वेबसाइट पर बने रहें।


Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top