इसरो ने अंतरिक्ष में लोबिया के बीजों को अंकुरित कर रचा इतिहास







इसरो ने अंतरिक्ष में लोबिया के बीजों को अंकुरित कर रचा इतिहास

इसरो ने अंतरिक्ष में लोबिया के बीजों को अंकुरित कर रचा इतिहास

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इसरो ने अंतरिक्ष में सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण परिस्थितियों में लोबिया के बीज को केवल चार दिनों में अंकुरित करने में सफलता प्राप्त की है। यह प्रयोग भविष्य में अंतरिक्ष में भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

कैसे हुआ प्रयोग?

इसरो ने 30 दिसंबर को स्पेडेक्स मिशन के साथ सीआरओपीएस (कनिष्ठ रिसर्च मॉडल फॉर अल्प प्लांट स्टडीज) पेलोड को भेजा।
विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) में डिजाइन किए गए सीआरओपीएस ने केवल चार दिनों में लोबिया के बीज को सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में अंकुरित कर दिया।
पहले अनुमान था कि इसमें सात दिन लगेंगे।
यह पेलोड एक उन्नत स्वचालित प्रणाली है, जो पौधों की वृद्धि और उनकी स्थिरता का अध्ययन करता है।

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लोबिया को क्यों चुना गया?

इस प्रयोग के लिए लोबिया के बीज इसलिए चुने गए क्योंकि ये तेजी से अंकुरित होते हैं और इनमें पोषण की भरपूर मात्रा होती है।
लोबिया में प्रोटीन और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की अधिकता इसे अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए आदर्श बनाती है।
बीजों को नियंत्रित वातावरण में संरक्षित करके भेजा गया था, जिससे उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित की गई।

अंतरिक्ष में पालक उगाने की तैयारी

लोबिया के बीजों के सफल प्रयोग के बाद अब इसरो पालक पर प्रयोग करने की योजना बना रहा है।
इसरो का उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों को लंबे अभियानों के दौरान ताजा भोजन उपलब्ध कराना है।
पालक के प्रयोग में सूर्य के प्रकाश, पोषक तत्वों और पानी को विशेष तरीकों से पौधों तक पहुंचाया जाएगा।
यह प्रयोग एक ही समय में धरती और अंतरिक्ष दोनों जगह किया जाएगा।

वास्तविक समय में होगी निगरानी

प्रयोग के लिए उपयोग किए गए पीईएम-4 मॉड्यूल में पौधों की वृद्धि की वास्तविक समय में निगरानी की जाती है।
इसमें उच्च-रिजॉल्यूशन कैमरे, ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड ट्रैकिंग, आर्द्रता मापन और मिट्टी की नमी जांचने की तकनीकें शामिल हैं।
यह सुनिश्चित करता है कि पौधों की वृद्धि का हर चरण सही ढंग से रिकॉर्ड किया जा सके।

स्पेस सेल्फी और रोबोटिक आर्म की सफलता

इसरो ने मिशन के दौरान स्पेस सेल्फी भी रिकॉर्ड की, जिसे सोशल मीडिया पर साझा किया गया।
साथ ही, इस मिशन में भारत की पहली अंतरिक्ष रोबोटिक आर्म का भी सफल संचालन किया गया।
इसे रिलोकेटेबल रोबोटिक मैनिपुलेटर टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर (आरआरएम-टीडी) के रूप में जाना जाता है।
रोबोटिक आर्म ने विभिन्न कार्यों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया, जो अंतरिक्ष रोबोटिक्स में भारत के लिए गौरव का क्षण है।

भविष्य की दिशा

इसरो का यह प्रयोग वैश्विक अंतरिक्ष शोध में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा।
अंतरिक्ष में पौधों की खेती का यह प्रयास भविष्य में चंद्रमा और मंगल अभियानों में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मददगार होगा।
यह सफलता भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।


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