नीट-यूजी परीक्षा सुधार: केंद्र सरकार की सिफारिशें और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
तारीख: 3 जनवरी, 2025
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का बयान
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) में सुधार के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली की समीक्षा के बाद विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को लागू करने की बात कही है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सात सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट जमा कर दी है और सरकार सभी सिफारिशों को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगी।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल हैं, ने मामले की सुनवाई को तीन महीने के लिए स्थगित कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि मामले को अप्रैल 2025 में सूचीबद्ध किया जाएगा।
कोर्ट ने पहले 2 अगस्त, 2024 को कहा था कि नीट-यूजी 2024 में प्रणालीगत लीक या कदाचार के पर्याप्त प्रमाण रिकॉर्ड में नहीं हैं।
विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें
सुप्रीम कोर्ट ने इसरो के पूर्व प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक सात सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति का उद्देश्य एनटीए की खामियों की पहचान करना और नीट-यूजी को पारदर्शी और कदाचार मुक्त बनाना था।
समिति की समीक्षा:
- झारखंड के हजारीबाग परीक्षा केंद्र में सुरक्षा चूक।
- स्ट्रांगरूम का पिछला दरवाजा खोलने की घटना।
- ई-रिक्शा के माध्यम से प्रश्नपत्र पहुंचाना।
- उम्मीदवारों को प्रश्नपत्रों के गलत सेट का वितरण।
नीट-यूजी में सुधारों की आवश्यकता
नीट-यूजी परीक्षा के दौरान सामने आई खामियों ने इसके पारदर्शिता स्तर और सुरक्षा उपायों पर सवाल उठाए। समिति ने इन खामियों को दूर करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाने की सिफारिश की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
निष्कर्ष
केंद्र सरकार का सभी सिफारिशों को लागू करने का निर्णय नीट-यूजी की शुचिता और पारदर्शिता को बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले को प्राथमिकता देते हुए सुनवाई स्थगित कर दी है।
भविष्य में नीट-यूजी परीक्षा के आयोजन में सुधार से छात्रों के हित सुरक्षित रहेंगे और परीक्षा की विश्वसनीयता बनी रहेगी।
