इसरो का न्यू जनरेशन लॉन्च व्हीकल (एनजीएलवी): अंतरिक्ष अनुसंधान में नया अध्याय
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने नई पीढ़ी के लॉन्च व्हीकल (एनजीएलवी) विकसित करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। यह यान 4000 किलोग्राम से अधिक वजनी उपग्रहों के प्रक्षेपण में सक्षम होगा, जिससे भारत की विदेशी एजेंसियों पर निर्भरता कम होगी।
8240 करोड़ रुपये का बजट
इसरो के अनुसार, इस परियोजना के लिए 8240 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। इस परियोजना के तहत नई पीढ़ी के लॉन्च व्हीकल के साथ-साथ रियूजेबल लॉन्च व्हीकल पर भी कार्य किया जा रहा है, जो अंतरिक्ष अनुसंधान को और किफायती और प्रभावी बनाएगा।
भारी उपग्रह प्रक्षेपण की आवश्यकता
देश में संचार, प्रसारण, निगरानी और मैपिंग की बढ़ती जरूरतों के चलते भारी उपग्रहों के प्रक्षेपण की मांग बढ़ रही है। इसके साथ ही, भारत दूसरे देशों और निजी क्षेत्रों के उपग्रहों को प्रक्षेपित कर अपना राजस्व बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।
मौजूदा समय में, इसरो चार हजार किलोग्राम तक के उपग्रहों को जीएसएलवी के जरिए लॉन्च करता है। इससे भारी उपग्रहों के लिए भारत को अमेरिका और यूरोप पर निर्भर रहना पड़ता है।
अमेरिका से जीसैट एन-2 का प्रक्षेपण
पिछले साल, इसरो ने जीसैट एन-2 उपग्रह, जो 4700 किलोग्राम वजनी था, अमेरिका के फ्लोरिडा से प्रक्षेपित किया। यह इसरो की वर्तमान क्षमता से अधिक वजनी था, जिसके कारण इसे विदेशी एजेंसियों से लॉन्च कराना पड़ा।
नई पीढ़ी के लॉन्च व्हीकल की विशेषताएं
- 4000 किलोग्राम से अधिक वजनी उपग्रहों को लॉन्च करने की क्षमता।
- आधुनिक तकनीकों के उपयोग से लॉन्च की लागत में कमी।
- देश की स्वदेशी अंतरिक्ष क्षमता को मजबूत करना।
- दूसरे देशों के उपग्रहों को प्रक्षेपित कर राजस्व वृद्धि।
इसरो ने 2032 तक इस लॉन्च व्हीकल को तैयार करने का लक्ष्य रखा है।
