केंद्रीय विद्यालय में अब बारहवीं तक पढ़ाई संभव, सांसद ने की पहल

### **केंद्रीय विद्यालय में अब बारहवीं तक पढ़ाई संभव, सांसद ने की पहल** 

**बहराइच।** 
एसएसबी मुख्यालय अगैया स्थित केंद्रीय विद्यालय में अब कक्षा 12 तक पढ़ाई का रास्ता साफ हो सकता है। सांसद डॉ. आनंद गोंड ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र सौंपकर विद्यालय को कक्षा 1 से 8 के स्तर से बढ़ाकर इंटरमीडिएट तक करने की मांग की है। शिक्षा मंत्री ने इस संबंध में जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है, जिससे आगामी सत्र से नई कक्षाओं के संचालन की उम्मीद बढ़ गई है। 



### **केंद्रीय विद्यालय की स्थापना और समस्या** 
केंद्रीय विद्यालय की स्थापना आकांक्षात्मक जिले बहराइच में पूर्व सांसद अक्षयबर लाल गोंड के प्रस्ताव पर की गई थी। यह विद्यालय परसा अगैया स्थित **सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी)** मुख्यालय परिसर में संचालित है, जहां जिले और आसपास के क्षेत्रों के बच्चों को प्रवेश दिया जाता है। 
– **वर्तमान स्थिति:** 
   – विद्यालय में फिलहाल कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई हो रही है। 
   – कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई न होने के कारण छात्रों को अन्य स्कूलों में प्रवेश लेना पड़ता है, जिससे अभिभावकों को असुविधा होती है। 



### **सांसद की पहल** 
अभिभावकों ने यह समस्या सांसद डॉ. आनंद गोंड के समक्ष रखी, जिसे उन्होंने गंभीरता से लिया। 
**प्रमुख कदम:** 
   – सांसद ने दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर इस विषय पर चर्चा की। 
   – **प्रस्ताव पत्र सौंपा**, जिसमें विद्यालय को इंटरमीडिएट तक विस्तार देने का आग्रह किया गया। 
   – सांसद ने बताया कि शिक्षा मंत्री ने जल्द ही आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है। 



### **आगामी योजनाएं और लाभ** 
अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो आने वाले सत्र से कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई शुरू हो सकती है। 
**लाभ:** 
   – छात्रों को दूसरे विद्यालयों में दाखिले के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। 
   – जिले के छात्रों को गुणवत्ता शिक्षा के साथ केंद्रीय विद्यालय की सुविधाएं घर के करीब मिलेंगी। 
   – इंटरमीडिएट स्तर तक की शिक्षा से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए बेहतर तैयारी का अवसर मिलेगा। 



### **निष्कर्ष** 
केंद्रीय विद्यालय बहराइच में कक्षा 12 तक पढ़ाई शुरू होने से जिले के अभिभावकों और छात्रों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हो सकती है। सांसद डॉ. आनंद गोंड की पहल से यह संभव हो पाया है। यदि शिक्षा मंत्रालय से स्वीकृति मिलती है, तो यह कदम जिले के शैक्षिक विकास में मील का पत्थर साबित होगा। 

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