⚖️ RO/ARO भर्ती 2023 पर हाईकोर्ट सख्त: नई नियुक्तियों पर लगाई अंतरिम रोक

⚖️ RO/ARO भर्ती 2023 पर हाईकोर्ट सख्त: नई नियुक्तियों पर लगाई अंतरिम रोक

आरक्षण विवाद में लखनऊ हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, 12 मई को होगी अगली सुनवाई

लखनऊ से बड़ी खबर सामने आई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट लखनऊ बेंच ने शुक्रवार को RO/ARO भर्ती परीक्षा-2023 की नई नियुक्तियों पर अंतरिम रोक लगा दी है।

अदालत ने यह आदेश भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण लागू किए जाने को लेकर उठे विवाद की सुनवाई करते हुए पारित किया। अब मामले की अगली सुनवाई 12 मई को होगी।


📌 क्या है पूरा मामला?

यह मामला RO/ARO भर्ती परीक्षा-2023 में आरक्षण व्यवस्था को लेकर उठे विवाद से जुड़ा है।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने विवेक यादव व अन्य अभ्यर्थियों द्वारा दाखिल विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

अपील में एकल पीठ के 1 फरवरी 2026 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत देने से इंकार कर दिया गया था।

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🧾 ओबीसी अभ्यर्थियों की बड़ी दलील

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि वे ओबीसी वर्ग से संबंधित हैं और प्रारंभिक परीक्षा में उनके अंक सामान्य वर्ग के कई चयनित अभ्यर्थियों से अधिक थे।

दलील के अनुसार:

  • सामान्य वर्ग के कम से कम 25 अभ्यर्थियों से अधिक अंक होने के बावजूद
  • ओबीसी अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए चयनित नहीं किया गया
  • उन्हें प्रारंभिक परीक्षा में असफल घोषित कर दिया गया

अभ्यर्थियों ने इसे आरक्षण नियमों के गलत अनुप्रयोग का मामला बताया।


🏛️ सरकार और आयोग ने क्या कहा?

मामले में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि भर्ती प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है और अधिकांश सफल अभ्यर्थियों को नियुक्तियां भी दी जा चुकी हैं।

हालांकि अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल नई नियुक्तियों पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया।


⚠️ भर्ती अभ्यर्थियों में बढ़ी चिंता

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों में चिंता बढ़ गई है। जिन अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, उन पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

वहीं दूसरी ओर, आरक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता और समान अवसर की मांग करने वाले अभ्यर्थी अदालत के इस फैसले को बड़ी राहत मान रहे हैं।


📅 अब 12 मई पर टिकी निगाहें

अब सभी की नजर 12 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है। माना जा रहा है कि उस दिन अदालत भर्ती प्रक्रिया और आरक्षण व्यवस्था पर महत्वपूर्ण टिप्पणी कर सकती है।

यदि याचिकाकर्ताओं की दलीलें सही पाई गईं तो भर्ती प्रक्रिया में बड़े बदलाव की संभावना भी बन सकती है।


✍️ सरकारी कलम की बात

सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता और आरक्षण नियमों का सही पालन बेहद जरूरी है। यदि अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को केवल तकनीकी या गलत आरक्षण प्रक्रिया के कारण बाहर किया जाता है, तो यह युवाओं के साथ अन्याय माना जाएगा।

हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य इस भर्ती से जुड़ा है। ऐसे में अदालत का निष्पक्ष निर्णय न केवल इस भर्ती बल्कि भविष्य की चयन प्रक्रियाओं के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा।

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