⚡ किसानों के लिए बड़ी राहत! हाईटेंशन बिजली लाइन पर मिलेगा पूरा मुआवजा 💰
📍 प्रयागराज/लखनऊ — किसानों के हक में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। Allahabad High Court ने हाईटेंशन बिजली लाइनों से प्रभावित जमीन के लिए उचित मुआवजा देने का आदेश दिया है।
👉 यह फैसला खासतौर पर उन किसानों के लिए राहत लेकर आया है, जिनकी जमीन पर बिना अधिग्रहण के ट्रांसमिशन लाइन डाल दी जाती है।
⚖️ क्या है पूरा मामला?
पश्चिमी यूपी के Shamli जिले के चार किसानों की जमीन पर हाईटेंशन बिजली ट्रांसमिशन लाइन बिछाई गई थी ⚡
🔹 टावर लगाने और तार खींचने से:
- फसल को नुकसान 🌾
- पेड़ों की कटाई 🌳
- जमीन की कीमत में गिरावट 📉
👉 किसानों को सिर्फ फसल और पेड़ों का आंशिक मुआवजा मिला
👉 लेकिन तार के नीचे के कॉरिडोर (ROW) के लिए कोई मुआवजा नहीं दिया गया
थक-हारकर किसानों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
👨⚖️ किन जजों ने दिया फैसला?
यह अहम फैसला न्यायमूर्ति Arindam Sinha और न्यायमूर्ति Prashant Kumar की खंडपीठ ने सुनाया।
📜 कोर्ट की बड़ी टिप्पणियां
कोर्ट ने साफ कहा 👇
👉 हाईटेंशन लाइन से जमीन की उपयोगिता और कीमत दोनों घटती हैं
👉 जमीन पर निर्माण, पेड़ लगाना और अन्य काम सीमित हो जाते हैं ❌
👉 भले ही जमीन अधिग्रहित न हो, लेकिन मालिक के अधिकार प्रभावित होते हैं
➡️ इसलिए मुआवजा देना अनिवार्य है
💰 कितना मिलेगा मुआवजा?
कोर्ट ने Ministry of Power (ऊर्जा मंत्रालय) के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया:
📅 15 अक्टूबर 2015 के नियम:
- टावर और ROW क्षेत्र के लिए मुआवजा तय किया गया था
📅 14 जून 2024 के नए नियम (बढ़ा हुआ मुआवजा):
👉 टावर बेस एरिया: भूमि मूल्य का 200%
👉 ROW (कॉरिडोर): भूमि मूल्य का 30%
❗ राज्य सरकार को फटकार
कोर्ट ने कहा 👇
❌ यूपी सरकार सिर्फ पुराने (2015) नियम लागू कर रही थी
❌ नए (2024) नियमों को नजरअंदाज कर रही थी
👉 यह रवैया किसानों के हितों के खिलाफ है
👉 सरकार मनमाने तरीके से मुआवजा देने से इनकार नहीं कर सकती
📢 कोर्ट का अंतिम आदेश
✔️ 10 मार्च 2026 का प्रशासनिक आदेश रद्द ❌
✔️ 14 जून 2024 के नए नियम लागू करने का निर्देश
✔️ किसानों को 4 हफ्ते के भीतर पूरा मुआवजा देने का आदेश ⏳
🎯 किसानों के लिए क्या मायने?
👉 अब:
- हाईटेंशन लाइन से प्रभावित हर किसान मुआवजा मांग सकता है
- जमीन अधिग्रहण न होने पर भी अधिकार सुरक्षित रहेंगे
- 2024 के बढ़े हुए रेट का लाभ मिलेगा 💰
🧠 Sarkari Kalam Analysis (शिक्षक व किसान हित में)
👉 यह फैसला किसानों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है
👉 अब बिजली प्रोजेक्ट्स में किसानों की अनदेखी आसान नहीं होगी
👉 भविष्य में हजारों किसान इस फैसले के आधार पर दावा कर सकते हैं
📌 निष्कर्ष
हाईटेंशन बिजली लाइन से प्रभावित किसानों के लिए यह फैसला बड़ी राहत और अधिकारों की जीत है। अब बिना उचित मुआवजे के उनकी जमीन का उपयोग करना आसान नहीं रहेगा।
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✍️ लेख: सरकारी कलम टीम
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