UP-TET 2026: भर्ती नहीं तो परीक्षा क्यों? बेरोजगारों ने किया यूपी-टीईटी के बहिष्कार का ऐलान
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने का सपना देख रहे लाखों बेरोजगारों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। आगामी 2 से 4 जुलाई तक प्रस्तावित उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UP-TET) को लेकर विवाद गहरा गया है। प्रशिक्षित बेरोजगारों के एक बड़े गुट ने इस परीक्षा का पूर्ण बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। युवाओं का सीधा सवाल है— “जब भर्ती का विज्ञापन नहीं, तो पात्रता परीक्षा का ढोंग क्यों?”
सरकारी खजाना भरने का जरिया बनी पात्रता परीक्षा?
बेरोजगारों का नेतृत्व कर रहे संगठनों का आरोप है कि सरकार शिक्षक भर्ती शुरू करने के बजाय केवल पात्रता परीक्षाओं के जरिए अपना कोष भरने में रुचि ले रही है।
जीव विज्ञान संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष जितेंद्र यादव ने सरकार की मंशा पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा:
“शिक्षा मंत्री संदीप सिंह सदन से लेकर सार्वजनिक मंचों तक लगातार यह बयान दे रहे हैं कि प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात पूरा है। यदि अनुपात संतुलित है और सरकार के पास नई भर्ती की कोई योजना नहीं है, तो फिर यूपी-टीईटी आयोजित कराकर करोड़ों रुपये क्यों वसूले जा रहे हैं?”
आंकड़ों की जुबानी: 8 साल का सूखा
प्रदेश में शिक्षक भर्ती की स्थिति पर नज़र डालें तो आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
- प्राथमिक स्तर (Primary): आखिरी बार 2018 में बड़ी शिक्षक भर्ती आई थी। तब से अब तक प्रदेश के लाखों युवा बी.एड. और डी.एल.एड. करके नई भर्ती का इंतज़ार कर रहे हैं।
- पात्रता का खेल: 2018 के बाद 2019 और 2021 में दो बार यूपी-टीईटी कराई जा चुकी है। हर साल लाखों छात्र आवेदन शुल्क देते हैं, जिससे सरकार को करोड़ों की आय होती है, लेकिन रोजगार के नाम पर सन्नाटा है।
- उच्च प्राथमिक स्तर: यहाँ स्थिति और भी गंभीर है। 2013 में विज्ञान और गणित के पदों पर भर्ती आई थी। इसके बाद 2021 में जूनियर एडेड हाईस्कूलों की भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई, जो विवादों और कोर्ट-कचहरी के चक्कर में आज भी अधर में लटकी है।
बेरोजगारों की मांग: पहले विज्ञापन, फिर परीक्षा
विरोध कर रहे छात्रों का कहना है कि वे परीक्षा के विरोधी नहीं हैं, लेकिन पात्रता परीक्षा का मतलब तब होता है जब सामने नौकरी की कोई उम्मीद हो। बिना रिक्त पदों के विज्ञापन के हर साल टीईटी कराना केवल बेरोजगारों के मानसिक और आर्थिक शोषण के समान है।
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी जंग
बहिष्कार के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर भी #UPPRT_Vacancy और #No_Recruitment_No_TET जैसे अभियान शुरू हो गए हैं। छात्र अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।
निष्कर्ष
UP-TET का बहिष्कार सरकार के लिए एक बड़ा संकेत है कि प्रदेश का शिक्षित युवा अब केवल ‘डिग्री और सर्टिफिकेट’ से संतुष्ट नहीं होने वाला। यदि सरकार जल्द ही रिक्त पदों पर भर्ती की घोषणा नहीं करती है, तो यह विरोध आने वाले समय में और उग्र रूप ले सकता है।
