⚖️ बड़ी राहत: तदर्थ सेवा भी पदोन्नति में गिनी जाएगी – हाईकोर्ट का अहम फैसला
सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत देते हुए Allahabad High Court Lucknow Bench ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि:
👉 यदि नियुक्ति प्रक्रिया वैध (विधिसम्मत) रही हो और कर्मचारी लगातार सेवा में रहा हो, तो तदर्थ (Adhoc) सेवा को भी पदोन्नति में गिना जाएगा।
📌 क्या है पूरा मामला?
यह मामला आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के दो कर्मचारियों से जुड़ा था:
- अनिल कुमार
- शैलेंद्र सिंह
👉 दोनों की:
- 1986 में जूनियर इंजीनियर के पद पर तदर्थ नियुक्ति हुई
- बाद में उनकी सेवाएं नियमित (Regular) की गईं
लेकिन विवाद तब पैदा हुआ जब:
❌ उनसे बाद में नियुक्त कर्मचारियों को
सहायक अभियंता (Assistant Engineer) पद पर पदोन्नति मिल गई
👉 जबकि याचियों को इससे वंचित रखा गया।
🏛️ सरकार का क्या तर्क था?
राज्य सरकार का कहना था:
- जब तक याचियों की सेवा नियमित नहीं हुई थी
- तब तक उन्हें पिछली तिथि से पदोन्नति नहीं दी जा सकती
⚖️ कोर्ट ने क्या कहा?
खंडपीठ ने सरकार की दोनों विशेष अपीलें खारिज करते हुए कहा:
✔️ अहम निर्देश:
- तदर्थ सेवा को भी पदोन्नति के लिए मान्य माना जाएगा
- यदि किसी कर्मचारी से जूनियर को पहले प्रमोशन मिल गया है,
तो सीनियर को भी उसी तारीख से प्रमोशन का अधिकार मिलेगा
👉 भले ही उसकी सेवा का नियमितीकरण बाद में हुआ हो।
📊 Sarkari Kalam Analysis 🧠
✔️ कर्मचारियों के लिए बड़ी जीत:
- लंबे समय से तदर्थ कर्मचारियों के साथ हो रहे अन्याय पर रोक
- वरिष्ठता (Seniority) को सही महत्व
⚠️ सरकार के लिए चुनौती:
- पुराने मामलों की रीव्यू और सुधार की जरूरत
- कई विभागों में बैकडेट प्रमोशन के दावे बढ़ सकते हैं
🎯 क्या होगा इसका असर?
👉 हजारों तदर्थ कर्मचारियों को फायदा मिल सकता है
👉 प्रमोशन और सीनियरिटी से जुड़े विवाद कम होंगे
👉 सरकारी विभागों में पारदर्शिता बढ़ेगी
🧾 निष्कर्ष
👉 हाईकोर्ट का यह फैसला सरकारी कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूत करता है
👉 यह स्पष्ट करता है कि सेवा की निरंतरता और वैध नियुक्ति ही असली आधार है, न कि सिर्फ नियमितीकरण की तारीख
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