⛽ ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा अलर्ट! सिर्फ 74 दिन का तेल भंडार, 90 दिन का लक्ष्य अधूरा ⚠️
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता सामने आई है। संसद की एक अहम समिति ने चेतावनी दी है कि देश के पास आपातकालीन हालात के लिए पर्याप्त पेट्रोलियम भंडार नहीं है। 😨
📊 कितना है भारत के पास तेल भंडार?
👉 पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार:
✔️ 9.5 दिन का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR)
✔️ 64.5 दिन का भंडार सरकारी तेल कंपनियों के पास
📌 👉 कुल मिलाकर: 74 दिन का भंडार
❗ जबकि जरूरत है कम से कम 90 दिनों के भंडार की
🏛️ किसने उठाए सवाल?
👉 Parliamentary Standing Committee on Petroleum and Natural Gas ने अपनी रिपोर्ट में कहा:
⚠️ वैश्विक हालात को देखते हुए
👉 भारत को कम से कम 3 महीने (90 दिन) का तेल स्टॉक रखना चाहिए
🛢️ कहां हैं देश के रणनीतिक भंडार?
भारत में फिलहाल ये प्रमुख SPR लोकेशन हैं:
📍 Visakhapatnam
📍 Mangaluru
📍 Padur
👉 कुल क्षमता: 53.3 लाख मैट्रिक टन
👉 संचालन: Indian Strategic Petroleum Reserves Limited (ISPRL)
🚧 फेज-2 प्रोजेक्ट में देरी
👉 2021 में सरकार ने नए भंडार बनाने की मंजूरी दी थी:
📍 Chandikhol
📍 Padur (दूसरा फेज)
👉 क्षमता: 65 लाख मैट्रिक टन
❗ लेकिन 5 साल बाद भी प्रोजेक्ट में बहुत धीमी प्रगति
💸 बजट की हालत भी खराब
📉 लगातार बजट में कटौती:
- 2023-24: ₹508 करोड़ ➝ घटकर ₹40 करोड़ (खर्च: 0)
- 2024-25: ₹408 करोड़ ➝ ₹30 करोड़ (खर्च: ₹17.25 करोड़)
- 2025-26: ₹100 करोड़ ➝ ₹20 करोड़ (खर्च: ₹14.54 करोड़)
👉 यानी आवंटित बजट का भी पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा 😟
🔥 मौजूदा स्थिति: क्या है चिंता?
👉 सरकार का कहना है:
✔️ कच्चे तेल की उपलब्धता फिलहाल सामान्य है
✔️ रिफाइनरी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं
❗ लेकिन:
👉 LPG (गैस सिलेंडर) की स्थिति चिंताजनक
👉 कई जगह लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं
🌍 पड़ोसी देशों को सप्लाई पर नजर
👉 भारत इन देशों को ईंधन सप्लाई करता है:
✔️ बांग्लादेश
✔️ नेपाल
✔️ भूटान
✔️ श्रीलंका
✔️ मालदीव
👉 सरकार ने साफ कहा है:
➡️ पहले देश की जरूरत, फिर निर्यात
💡 समिति की बड़ी सलाह
✔️ 90 दिन का भंडार जल्द तैयार किया जाए
✔️ बजट में कटौती न हो
✔️ प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा किया जाए
✔️ नए भूमिगत भंडार (Underground Storage) खोजे जाएं
📢 निष्कर्ष
👉 भारत की ऊर्जा सुरक्षा फिलहाल सीमित स्तर पर सुरक्षित है
👉 लेकिन वैश्विक संकट बढ़ने पर खतरा बढ़ सकता है
⚠️ अगर समय रहते रणनीतिक भंडार नहीं बढ़ाया गया,
तो भविष्य में तेल और गैस की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है
