🎒 1 अप्रैल से शुरू होगा ‘स्कूल चलो अभियान’, 21% ड्रॉपआउट छात्रों को फिर से स्कूल लाने की तैयारी
प्रदेश में शैक्षिक सत्र 2026-27 की शुरुआत को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए बेसिक शिक्षा के साथ-साथ माध्यमिक विद्यालयों में भी ‘स्कूल चलो अभियान’ चलाने का फैसला किया है।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्कूल छोड़ रहे छात्रों (ड्रॉपआउट) को वापस शिक्षा से जोड़ना और नामांकन बढ़ाना है। 📚
📅 1 अप्रैल से पूरे प्रदेश में अभियान
प्रदेश के Basic Education Department Uttar Pradesh और
Uttar Pradesh Secondary Education Department के विद्यालयों में नया सत्र 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा।
इसी दिन से ‘स्कूल चलो अभियान’ को भी पूरे प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।
अब तक यह अभियान मुख्य रूप से बेसिक स्कूलों तक सीमित था, लेकिन इस बार माध्यमिक विद्यालयों को भी इसमें शामिल किया गया है।
📊 कक्षा 8 के बाद 21% छात्र छोड़ रहे पढ़ाई
माध्यमिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार:
- कक्षा 8 पास करने के बाद केवल 79% छात्र ही कक्षा 9 में नामांकन करा रहे हैं।
- यानी लगभग 21% छात्र बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं।
📉 ड्रॉपआउट का आंकड़ा
विवरणसंख्याकक्षा 8 में कुल छात्रलगभग 37 लाखकक्षा 9 में नामांकनलगभग 79%ड्रॉपआउट छात्रलगभग 8.17 लाख
इनमें:
- 4.13% छात्र
- 4.03% छात्राएं
शामिल हैं।
🎯 अभियान का मुख्य लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य है कि कक्षा 8 में पढ़ने वाले अधिक से अधिक बच्चों का कक्षा 9 में नामांकन कराया जाए, ताकि ड्रॉपआउट दर कम हो सके।
इसके लिए:
- कम नामांकन वाले क्षेत्रों की पहचान की जाएगी
- ड्रॉपआउट बच्चों की सूची तैयार होगी
- शिक्षकों व अधिकारियों को घर-घर संपर्क करने के निर्देश दिए जाएंगे
🧑🏫 सामुदायिक भागीदारी पर जोर
अभियान को सफल बनाने के लिए समुदाय की भागीदारी पर विशेष जोर दिया जाएगा।
इसके तहत:
- अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा
- ग्राम पंचायतों की मदद ली जाएगी
- स्थानीय समाजसेवी संस्थाओं को भी जोड़ा जाएगा
ताकि हर बच्चे को स्कूल तक लाया जा सके।
📚 माध्यमिक शिक्षा में 1.07 करोड़ छात्र
प्रदेश में इस समय कक्षा 9 से 12 तक लगभग 1.07 करोड़ छात्रों का नामांकन है।
सरकार का मानना है कि यदि स्कूल चलो अभियान को प्रभावी तरीके से चलाया जाए तो आने वाले वर्षों में यह संख्या और बढ़ सकती है।
✅ कुल मिलाकर सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और ड्रॉपआउट की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सके।
