⚖️ 2015 सामूहिक नकल कांड: आठ शिक्षक दोषी, चार-चार माह की सजा
शिक्षा व्यवस्था की साख से जुड़े एक अहम फैसले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. कृष्ण प्रताप सिंह ने वर्ष 2015 की इंटरमीडिएट परीक्षा में सामूहिक नकल प्रकरण में आठ शिक्षकों को दोषी ठहराते हुए चार-चार महीने के कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर दो-दो हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। जुर्माना न देने पर 15-15 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
🏫 किस कॉलेज का मामला?
यह प्रकरण कृषक इंटर कॉलेज संतपुर गोड़सरा (कोपागंज थाना क्षेत्र) से जुड़ा है। वर्ष 2015 में इंटरमीडिएट के अंग्रेजी विषय के प्रथम प्रश्नपत्र की परीक्षा के दौरान सामूहिक नकल पकड़ी गई थी। आरोप था कि प्रश्नों के उत्तर छात्रों को बोल-बोलकर लिखवाए गए।
📚 किस कानून के तहत सजा?
अदालत ने आठ शिक्षकों को उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम की धारा 10 के तहत दोषी पाया। इस मामले में कुल 22 लोग नामजद थे; शेष आरोपियों की पत्रावली अलग कर दी गई थी।
🧑⚖️ अदालत की सख्त टिप्पणी
सीजेएम ने अपने आदेश में कहा कि परीक्षा की स्वच्छता और पारदर्शिता बनाए रखने में शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
- दोषसिद्ध व्यक्तियों को यह अहसास होना चाहिए कि उन्होंने अपराध किया है।
- पीड़ित पक्ष को भी यह भरोसा होना चाहिए कि उसके साथ न्याय हुआ है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि परीक्षा व्यवस्था में अनुचित साधनों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
✍️ सरकारी कलम की राय
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता ही विद्यार्थियों के भविष्य की नींव है।
👉 नकल जैसे अपराध मेधावी छात्रों के साथ अन्याय हैं।
👉 दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से गलत प्रवृत्तियों पर अंकुश लगेगा।
👉 परीक्षा की निष्पक्षता पर जनता का विश्वास बना रहना चाहिए।
सरकारी कलम का मानना है कि ईमानदार और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली ही मजबूत समाज और सशक्त राष्ट्र का आधार है। 📖✨
