✊ टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ प्रदेशभर में शिक्षकों का प्रदर्शन, पीएम को भेजा ज्ञापन

✊ टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ प्रदेशभर में शिक्षकों का प्रदर्शन, पीएम को भेजा ज्ञापन

प्रदेश में टीईटी अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों का आक्रोश खुलकर सामने आया। Teachers Federation of India (टीएफआई) के बैनर तले उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ और उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने बृहस्पतिवार को पूरे प्रदेश में धरना-प्रदर्शन किया।

शिक्षकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से Narendra Modi को ज्ञापन भेजकर मांग की कि आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दी जाए


⚖️ सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़ी चिंता

हालिया आदेश में Supreme Court of India द्वारा प्राथमिक शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किए जाने के बाद, आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों की नौकरी पर भी संकट खड़ा हो गया है।

शिक्षकों का कहना है कि जब उनकी नियुक्ति के समय टीईटी की शर्त लागू नहीं थी, तो अब उसे पूर्व प्रभाव से लागू करना अन्यायपूर्ण है।


🏫 बीएसए कार्यालयों पर जुटे शिक्षक

प्रदेश के विभिन्न जिलों में शिक्षक बीएसए कार्यालयों पर एकत्र हुए और शिक्षा मंत्रालय के खिलाफ नारेबाजी की।

WhatsApp Channel Join Now
WhatsApp Group Join Now
Telegram Channel Join Now

“JUSTICE FOR TEACHER” के नारों के साथ शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।


🏛️ राजधानी लखनऊ में तीन घंटे चला धरना

लखनऊ में शिक्षा भवन पर करीब एक हजार शिक्षकों ने तीन घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया।

  • शिक्षकों ने भवन का घेराव किया
  • कुछ समय के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों के आवागमन पर भी असर पड़ा
  • आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की मांग दोहराई गई

टीएफआई के प्रांतीय उपाध्यक्ष सुधांशु मोहन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आरटीई अधिनियम की मूल भावना के अनुरूप नहीं है।


📜 संसद में अध्यादेश लाने की मांग

टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि:

“शिक्षा मंत्रालय संसद में अध्यादेश लाकर शिक्षकों को राहत दे।”

उन्होंने बताया कि 7 मार्च को दिल्ली में टीएफआई की बैठक होगी, जिसमें सभी राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष और महासचिव शामिल होंगे। इसी बैठक में दिल्ली में प्रस्तावित रैली की तिथि घोषित की जाएगी।


✍️ सरकारी कलम की टिप्पणी

शिक्षकों का यह आंदोलन केवल नौकरी का सवाल नहीं, बल्कि सेवा शर्तों की स्थिरता और न्याय का भी मुद्दा है।

📌 यदि नियुक्ति के समय कोई शर्त लागू नहीं थी, तो उसे वर्षों बाद लागू करना स्वाभाविक रूप से विवाद का विषय बनेगा।
📌 सरकार और शिक्षा मंत्रालय को इस संवेदनशील मुद्दे पर संतुलित समाधान निकालना चाहिए।

सरकारी कलम शिक्षकों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाता रहेगा और हर अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा। 📚✊

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top