⚖️ सुप्रीम कोर्ट का स्पष्टीकरण: SIR में पहचान सत्यापन के लिए कक्षा 10 का प्रवेश पत्र “पूरक दस्तावेज” के रूप में मान्य
नई दिल्ली। Supreme Court of India ने बुधवार को स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में जारी SIR (Special Intensive Revision) के दौरान पहचान सत्यापन के लिए कक्षा 10 का प्रवेश पत्र (Admit Card) अपने आप में पूर्ण पहचान दस्तावेज नहीं, बल्कि पूरक दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जा सकता है—बशर्ते उसे उत्तीर्ण प्रमाणपत्र के साथ लगाया जाए।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश Surya Kant, न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi और न्यायमूर्ति Vipul M Pancholi की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू द्वारा मामले का उल्लेख किए जाने के बाद पारित किया।
🧾 क्या था विवाद?
वरिष्ठ अधिवक्ता ने चिंता जताई थी कि क्या कक्षा 10 का प्रवेश पत्र अपने आप में पूर्ण पहचान दस्तावेज माना जा सकता है। इस पर शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि:
- प्रवेश पत्र केवल पूरक (Supplementary) दस्तावेज होगा।
- इसे माध्यमिक (कक्षा 10) के उत्तीर्ण प्रमाणपत्र के साथ प्रस्तुत किया जा सकता है।
- जन्मतिथि/पारिवारिक पहचान के समर्थन में प्रमाणपत्र के साथ समेकित रूप से देखा जाएगा।
📌 आदेश का व्यावहारिक असर
✔️ SIR के दौरान दस्तावेज़ी अस्पष्टता कम होगी।
✔️ जिन अभ्यर्थियों के पास सीमित दस्तावेज़ हैं, उन्हें राहत मिलेगी।
✔️ पहचान सत्यापन में स्पष्ट दिशा-निर्देश से प्रशासनिक प्रक्रिया सुगम होगी।
📝 सरकारी कलम की टिप्पणी
यह स्पष्टीकरण बताता है कि अदालत दस्तावेज़ी प्रक्रियाओं में व्यावहारिकता और संतुलन चाहती है। प्रवेश पत्र को अकेले पर्याप्त न मानते हुए, प्रमाणपत्र के साथ स्वीकार करने की व्यवस्था से सत्यापन की विश्वसनीयता भी बनी रहेगी और योग्य आवेदकों को अनावश्यक बाधा भी नहीं होगी।
✍️ लेख: सरकारी कलम टीम
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