⚖️ एनसीईआरटी की कक्षा 8 की पुस्तक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

⚖️ एनसीईआरटी की कक्षा 8 की पुस्तक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

“न्यायपालिका को बदनाम करने की अनुमति नहीं” – सीजेआई सूर्यकांत

नई दिल्ली। कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” शीर्षक अध्याय को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने गंभीर रुख अपनाया है। Supreme Court of India ने इस विषय पर स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे अत्यंत चिंताजनक बताया है।

सुनवाई के दौरान भारत के प्रधान न्यायाधीश Surya Kant ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा—

“मैं किसी को भी इस धरती पर संस्थान की अखंडता को धूमिल करने और संस्थान को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा। चाहे वह कितना भी ऊंचा क्यों न हो, कानून अपना काम करेगा। यह एक सोची-समझी साजिश प्रतीत होती है।”


🏛️ संविधान के मूल ढांचे पर सवाल?

पीठ में शामिल न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi ने भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पुस्तक की सामग्री संविधान के मूल ढांचे (Basic Structure) के विरुद्ध प्रतीत होती है।

यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि संविधान का मूल ढांचा सिद्धांत न्यायपालिका की स्वतंत्रता और अखंडता की रक्षा करता है।

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📚 विवादित अध्याय में क्या है?

NCERT की सामाजिक विज्ञान पुस्तक में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” शीर्षक से एक खंड शामिल था, जिसमें—

  • न्यायपालिका में लंबित मामलों के बोझ,
  • न्यायाधीशों की संख्या की कमी,
  • आचार संहिता (Code of Conduct)
    जैसे विषयों का उल्लेख किया गया था।

हालांकि, शीर्ष अदालत ने इस प्रस्तुतीकरण को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है।


👩‍⚖️ वरिष्ठ वकीलों ने उठाया मुद्दा

मामले का उल्लेख वरिष्ठ अधिवक्ताओं Kapil Sibal और Abhishek Manu Singhvi ने अदालत के समक्ष किया। इसके बाद पीठ ने इसे तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह इस मामले पर विस्तार से सुनवाई करेगा।


📝 एनसीईआरटी ने मांगी माफी

विवाद बढ़ने के बाद एनसीईआरटी ने स्पष्ट किया कि—

  • उसका उद्देश्य किसी संवैधानिक संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाना नहीं था।
  • विवादित अंशों की समीक्षा की जाएगी।
  • आवश्यकता पड़ने पर संशोधन या पुनर्लेखन किया जाएगा।

🎯 सरकारी कलम की टिप्पणी

“सरकारी कलम” का मानना है कि शिक्षा प्रणाली में छात्रों को जागरूक और तथ्यपरक जानकारी देना आवश्यक है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की प्रस्तुति अत्यंत संतुलित और जिम्मेदार होनी चाहिए।

न्यायपालिका लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है। ऐसे में पाठ्यपुस्तकों की भाषा और संदर्भों में विशेष सावधानी अपेक्षित है।


📌 निष्कर्ष

Supreme Court of India की कड़ी टिप्पणियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि न्यायपालिका की प्रतिष्ठा और स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में अदालत किसी भी प्रकार की लापरवाही या दुर्भावना को स्वीकार नहीं करेगी।

अब सबकी निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस मामले की विस्तृत जांच और दिशा तय होगी।


✍️ लेख: सरकारी कलम टीम
🌐 www.sarkarikalam.com

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