⚖️ पेंशन से कटौती पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त, 11 लाख की वसूली रद्द 🚫

⚖️ पेंशन से कटौती पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त, 11 लाख की वसूली रद्द 🚫

प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन से कटौती केवल सिविल सर्विस रेगुलेशन के अनुच्छेद 351-ए के तहत विधिसम्मत अनुमति और विधिवत विभागीय कार्यवाही के बाद ही की जा सकती है।

कोर्ट ने सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य से लगभग 11 लाख रुपये की वसूली का आदेश रद्द कर दिया। हालांकि यह भी कहा कि आरोप गंभीर हैं, इसलिए संबंधित अधिकारी यदि चाहें तो राज्यपाल की वैध अनुमति लेकर विधिसम्मत विभागीय कार्यवाही शुरू कर सकते हैं।


🧑‍🏫 क्या था पूरा मामला?

यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने सुरेंद्र दत्त कौशिक की याचिका स्वीकार करते हुए दिया।

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  • याची सर्वोदय मंदिर इंटर कॉलेज, बागपत में प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
  • उन पर मिड-डे मील/पीएम पोषण योजना के तहत लगभग ₹11,14,160 के गबन का आरोप लगाया गया।
  • सेवाकाल के दौरान उनके खिलाफ कोई विभागीय जांच नहीं की गई
  • सेवानिवृत्ति के बाद सीधे वसूली आदेश जारी कर दिया गया।

याची ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी।


📜 कोर्ट ने क्या कहा?

हाई कोर्ट ने अपने 15 दिसंबर 2023 के आदेश में—

  • बीएसए बागपत के 20 मई 2023 के आदेश
  • और ब्लॉक विकास अधिकारी, बड़ौत के 24 मई 2023 के आदेश

को निरस्त कर दिया।

साथ ही निर्देश दिया कि याची को विधि अनुसार सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान किए जाएं।

कोर्ट ने दो टूक कहा कि—

“सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन से कटौती तभी संभव है, जब अनुच्छेद 351-ए के तहत विधिसम्मत अनुमति और विभागीय कार्यवाही पूरी की गई हो।”


📌 महत्वपूर्ण कानूनी संदेश

  • बिना विभागीय जांच के सीधे पेंशन से वसूली नहीं की जा सकती।
  • राज्यपाल की स्वीकृति आवश्यक है (जहां नियम लागू हो)।
  • सेवानिवृत्त कर्मचारियों के अधिकार सुरक्षित हैं, पर गंभीर आरोप होने पर कानूनन कार्रवाई संभव है।

✍️ सरकारी कलम की बात

यह निर्णय हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है। अक्सर सेवानिवृत्ति के बाद अचानक वसूली आदेश जारी कर दिए जाते हैं, जिससे पेंशनभोगियों को आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है।

हाई कोर्ट का यह फैसला स्पष्ट करता है कि प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है और प्रशासन मनमानी नहीं कर सकता।

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