✊ देशभर में टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का उभार, ‘जस्टिस फॉर टीचर’ अभियान से तेज हुआ आंदोलन
देश भर के प्राथमिक शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के विरोध में एक बार फिर आंदोलन ने रफ्तार पकड़ ली है। टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) और उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के नेतृत्व में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर ‘जस्टिस फॉर टीचर’ अभियान चलाया गया, जिसमें लाखों शिक्षकों ने अपनी आवाज बुलंद की।
🕑 दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे तक चले इस डिजिटल अभियान में शिक्षकों ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। संसद से कानून पारित कर इस “अन्याय” को समाप्त करने की बात प्रमुखता से उठाई गई।
📢 क्या है शिक्षकों की आपत्ति?
टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि देश के सभी राज्यों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 (RTE) लागू होने से पूर्व, राज्यों द्वारा निर्धारित अर्हता के आधार पर ही शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी।
👉 ऐसे में 25-30 वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों पर बाद में लागू की गई टीईटी की शर्त थोपना सरासर अन्याय है।
शिक्षकों का तर्क है कि:
- नियुक्ति के समय उन्होंने सभी निर्धारित योग्यताएं पूरी की थीं।
- वर्षों की सेवा के बाद अचानक “अयोग्य” करार देना उनके सम्मान पर चोट है।
- यह लाखों शिक्षकों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है।
🏛️ अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ का गठन
आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने के लिए राजधानी लखनऊ में विभिन्न शिक्षक संगठनों की बैठक कर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ का गठन किया गया।
बैठक में कई प्रमुख संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए और आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की रणनीति तय की गई।
🗓️ आंदोलन की रूपरेखा
🔹 पहला चरण (9–15 मार्च):
“शिक्षकों की पाती” अभियान के तहत राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष को ईमेल व पोस्टकार्ड भेजे जाएंगे।
🔹 दूसरा चरण:
जिलों में मशाल जुलूस निकाले जाएंगे।
🔹 तीसरा चरण:
यदि मांगें नहीं मानी गईं तो 3 मई को लखनऊ घेराव और मानसून सत्र में संसद भवन घेराव की चेतावनी दी गई है।
🎙️ नेताओं के बयान
- सुशील पांडेय (अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक) ने कहा कि यह लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ी जाएगी।
- विजय कुमार बंधु (अटेवा) ने इसे शिक्षकों के अस्तित्व की लड़ाई बताया।
- संतोष तिवारी और दिलीप चौहान (विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन) ने कहा कि नियुक्ति के समय सभी योग्यताएं पूरी करने के बावजूद अब टीईटी अनिवार्य करना पूर्णत: गलत है।
🖤 काली पट्टी बांधकर पढ़ाएंगे शिक्षक
आंदोलन के तहत शिक्षकों ने निर्णय लिया है कि वे काली पट्टी बांधकर पठन-पाठन करेंगे, ताकि विरोध भी दर्ज हो और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित न हो।
यह कदम दर्शाता है कि शिक्षक अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहते, लेकिन अपने सम्मान और अधिकारों के लिए संघर्ष करने को भी तैयार हैं।
⚖️ बड़ा सवाल: क्या संसद से होगा समाधान?
शिक्षक संगठनों की मुख्य मांग है कि केंद्र सरकार संसद में कानून पारित कर आरटीई से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से छूट दे।
यदि सरकार समय रहते संवाद और समाधान की दिशा में कदम नहीं उठाती, तो यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक हो सकता है।
✍️ सरकारी कलम की टिप्पणी
सरकारी कलम मानता है कि—
📌 वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के सम्मान और भविष्य की रक्षा होनी चाहिए।
📌 सरकार को संवेदनशीलता के साथ समाधान निकालना चाहिए।
📌 शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता और शिक्षकों का मनोबल बनाए रखना सर्वोपरि है।
यह केवल एक परीक्षा का प्रश्न नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के भविष्य और शिक्षकों के आत्मसम्मान का मुद्दा है। अब देखना यह है कि सरकार इस आंदोलन को किस तरह लेती है — संवाद से या टकराव से। ✊📚
