⚖️ वकील की गैरहाजिरी की सजा मुवक्किल को नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
अपील खारिज करने के बजाय एमिक्स क्यूरी नियुक्त करने का निर्देश
प्रयागराज।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कहा है कि वकील की गैरहाजिरी का खामियाजा मुवक्किल को नहीं भुगतना चाहिए। ऐसी स्थिति में अदालत को अपील खारिज करने के बजाय न्याय मित्र (Amicus Curiae) नियुक्त कर मामले का निस्तारण गुण-दोष के आधार पर करना चाहिए।
🧑⚖️ सत्र अदालत का आदेश रद्द, अपील बहाल
इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद की एकल पीठ ने
संजय यादव बनाम राज्य मामले में सत्र न्यायालय, गोरखपुर के आदेश को रद्द कर दिया।
📌 क्या था पूरा मामला?
- मामला सहजनवा थाना क्षेत्र से जुड़ा है
- वर्ष 2022 में चेक अनादरण (138 NI Act) के मामले में
👉 मजिस्ट्रेट अदालत ने संजय यादव को सजा सुनाई - इसके खिलाफ सत्र न्यायालय में अपील दाखिल की गई
🚫 वकील की अनुपस्थिति में अपील खारिज
सुनवाई के दौरान—
❗ याची जेल में बंद था
❗ उसका वकील अदालत में उपस्थित नहीं हो सका
इसी आधार पर सत्र न्यायालय ने
📅 26 अक्तूबर 2023 को अपील को अदम पैरवी में खारिज कर दिया।
इसके बाद याची ने देरी माफी के साथ दूसरी अपील दाखिल की, लेकिन
⚠️ वह अपील भी सत्र अदालत से खारिज कर दी गई।
🏛️ हाईकोर्ट का स्पष्ट रुख
हाईकोर्ट में याची की ओर से दलील दी गई कि—
✔️ याची जेल में था
✔️ प्रभावी पैरवी संभव नहीं हो सकी
✔️ बिना पक्ष सुने अपील खारिज करना न्यायसंगत नहीं
हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए कहा—
“अपीलार्थी का पक्ष सुने बिना अपील खारिज नहीं की जा सकती। वकील की गैरहाजिरी की सजा मुवक्किल को नहीं दी जा सकती।”
🔁 सत्र अदालत को क्या निर्देश दिए?
✔️ सत्र न्यायालय का आदेश रद्द
✔️ अपील को पुराने नंबर से पुनर्जीवित किया जाए
✔️ मामले का नए सिरे से गुण-दोष के आधार पर निस्तारण किया जाए
✔️ आवश्यकता पड़ने पर एमिक्स क्यूरी नियुक्त की जाए
🚔 झांसी मामला: मुकदमे की कार्यवाही पर रोक
इसी क्रम में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में—
📍 झांसी के सिपरी बाजार थाना क्षेत्र
👤 हेमंत सोनी उर्फ चिंटू के खिलाफ
सीजेएम कोर्ट में चल रही पूरी कार्यवाही पर रोक लगा दी।
📌 आरोप क्या था?
- याची ने आरोप लगाया कि
❗ पुलिस ने दुर्भावना से झूठी एफआईआर दर्ज कराई
❗ एक पुरानी घटना को आधार बनाया गया
हाईकोर्ट ने—
✔️ मामले को विचारणीय माना
✔️ शिकायतकर्ता व राज्य सरकार से जवाब तलब किया
✍️ सरकारी कलम की राय
“यह फैसला आम नागरिकों के न्याय के अधिकार को मजबूत करता है। जेल में बंद व्यक्ति या साधनहीन मुवक्किल की आवाज सिर्फ वकील की मौजूदगी पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। अदालत का दायित्व है कि वह न्याय सुनिश्चित करे, न कि तकनीकी आधार पर उसे खत्म कर दे।”
📌 निष्कर्ष
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह निर्णय
⚖️ न्यायिक संवेदनशीलता
⚖️ मुवक्किल के अधिकारों की रक्षा
⚖️ निष्पक्ष सुनवाई की गारंटी
को मजबूत करता है।
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