Gen-Z Reality: महंगाई और कम सैलरी से जूझते युवा, 2 नौकरियां करने पर मजबूर; मानसिक सेहत पर बढ़ा खतरा
New York/New Delhi: क्या आप भी नौकरी के साथ ‘फ्रीलांसिंग’ या कोई दूसरा काम तलाश रहे हैं? अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं। दुनिया भर में जेन-जी (Gen-Z) यानी नई पीढ़ी के युवा इस वक्त महंगाई, अनिश्चित नौकरियों और कम आमदनी के तिहरे दबाव से गुजर रहे हैं।
एक हालिया रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि आर्थिक तंगी का असर अब युवाओं की सिर्फ जेब पर नहीं, बल्कि उनकी मानसिक सेहत (Mental Health), रिश्तों और भविष्य की उम्मीदों पर भी पड़ रहा है।
सुकून गायब, रिटायरमेंट का डर: टॉकर रिसर्च की रिपोर्ट
अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘टॉकर रिसर्च’ के शोध में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं:
- दोहरी मेहनत: युवा अब एक नौकरी से गुजारा न होने के कारण दो-दो नौकरियां (Moonlighting) कर रहे हैं।
- फुर्सत की कमी: ज्यादा काम करने के बावजूद उन्हें न तो सुकून मिल रहा है और न ही भविष्य सुरक्षित लग रहा है।
- रिटायरमेंट की चिंता: बुढ़ापे और रिटायरमेंट के बाद जीवन कैसे कटेगा, यह डर जेन-जी की रोजमर्रा की हकीकत बन चुका है।
कोविड महामारी के दौरान शुरू हुआ ‘पार्ट टाइम’ काम करने का चलन अब मजबूरी बन गया है। युवा अपनी मुख्य नौकरी के बाद शाम को या छुट्टियों में अतिरिक्त आमदनी के लिए काम कर रहे हैं।
पैसे बचाने के लिए ‘जुगाड़’ अपना रहे युवा
बढ़ती महंगाई से निपटने के लिए जेन-जी ने अपने लाइफस्टाइल में बड़े बदलाव किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पैसे बचाने के लिए युवा किस हद तक समझौते कर रहे हैं, देखिए ये आंकड़े:बचत का तरीकाकितने प्रतिशत युवा (Gen-Z)घर का बना खाना खाना44%सस्ते स्टोर से खरीदारी38%खुद बाल काटना / सेकंड हैंड सामान26%
भारत में बढ़ा ‘फ्रीलांसिंग’ का क्रेज (NITI Aayog Report)
यह समस्या सिर्फ विदेशों तक सीमित नहीं है। भारत में भी युवाओं ने रोजगार का तरीका बदल दिया है। पारंपरिक “9 से 5” की नौकरी के साथ-साथ अब फ्रीलांसिंग (Gig Economy) का चलन तेजी से बढ़ा है।
नीति आयोग (NITI Aayog) के आंकड़े बताते हैं:
- 2020-21: भारत में लगभग 77 लाख लोग फ्रीलांसिंग कर रहे थे।
- 2029-30 (अनुमान): यह संख्या बढ़कर 2.35 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है।
- रुझान: देश में हर तीसरा व्यक्ति अपनी पूर्णकालिक (Full-time) नौकरी से अलग कुछ न कुछ एक्स्ट्रा काम कर रहा है।
निष्कर्ष: बदलता वक्त और चुनौतियां
यह रिपोर्ट साफ करती है कि आज का युवा मेहनती है, लेकिन आर्थिक दबाव ने उसके जीवन से ‘सुकून’ छीन लिया है। मूनलाइटिंग और गिग इकोनॉमी (Gig Economy) अब भविष्य की जरूरत बन चुकी है। सरकारों और कंपनियों को युवाओं की मानसिक सेहत और आर्थिक सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
Sarkari Kalam की राय: अगर आप भी एक्स्ट्रा इनकम के लिए फ्रीलांसिंग की सोच रहे हैं, तो अपनी स्किल डेवलपमेंट पर ध्यान दें। सरकारी योजनाओं और स्किल इंडिया मिशन का लाभ उठाएं।
