⚖️ प्रधानाध्यापक व सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती

⚖️ प्रधानाध्यापक व सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती

प्रयागराज से शिक्षा जगत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है।
सहायता प्राप्त अशासकीय जूनियर हाईस्कूलों में
प्रधानाध्यापक एवं सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया को
इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है और
अगली सुनवाई की तिथि 12 जनवरी तय की गई है। 🏛️

📌 क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि
1 मार्च 2021 को जारी भर्ती विज्ञापन और
शिक्षा निदेशक (बेसिक) द्वारा
3 नवंबर 2025 को जारी सर्कुलर के
कुछ प्रावधान आरक्षण नियमों के विपरीत हैं।
इसी आधार पर भर्ती प्रक्रिया को न्यायालय में चुनौती दी गई है। 📄

📊 आरक्षण व्यवस्था पर उठे सवाल

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में:

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  • अनुसूचित जाति (SC) को 21% आरक्षण
  • अनुसूचित जनजाति (ST) को 2% आरक्षण
  • अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27% आरक्षण
  • ईडब्ल्यूएस (EWS) को 10% आरक्षण

देने के बावजूद वर्टिकल आरक्षण का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।
साथ ही दिव्यांग, महिला एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों को
हॉरिजॉन्टल आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया, जिससे कई अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित हो रहे हैं। ⚠️

🪖 पूर्व सैनिकों ने भी दायर की याचिका

इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर पूर्व सैनिकों ने भी इलाहाबाद हाईकोर्ट में
अलग से याचिका दायर की है।
उनका कहना है कि आरक्षण अधिनियम 1993 के तहत
पूर्व सैनिकों के लिए निर्धारित 5% आरक्षण का पालन नहीं किया गया।
इस याचिका पर भी 12 जनवरी को सुनवाई होगी। 🎖️

🗣️ याचिकाकर्ताओं की प्रमुख दलीलें

वरिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा अदालत में यह तर्क दिया गया कि
भर्ती विज्ञापन में रिक्त पदों की संख्या और आरक्षित पदों का स्पष्ट विवरण नहीं है,
जो सीधे तौर पर आरक्षण नीति का उल्लंघन है।
इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा
30 दिसंबर 2025 को जारी निर्देशों का भी पालन नहीं किया गया। 📢

🏫 राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि राज्य सरकार ने स्पष्ट आदेश दिए थे कि
राज्याधीन सेवाओं में अनुपातिक और क्षैतिज आरक्षण का
मानक के अनुसार पालन सुनिश्चित किया जाए,
लेकिन भर्ती प्रक्रिया में इन नियमों की अनदेखी की गई। ❌

👩‍⚖️ हाईकोर्ट का रुख

न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने
राज्य सरकार से पूरे मामले में जवाब मांगा है।
कोर्ट का कहना है कि यदि प्रथम दृष्टया नियमों का उल्लंघन पाया गया,
तो भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक भी लग सकती है। ⚖️

✨ निष्कर्ष

प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक भर्ती से जुड़ा यह मामला
हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।
अब सभी की नजरें 12 जनवरी को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं,
जहां यह तय होगा कि भर्ती प्रक्रिया जारी रहेगी या उसमें बदलाव करना पड़ेगा।
यह फैसला शिक्षा व्यवस्था और आरक्षण नीति दोनों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। 👀

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