⚖️ पेट में छोड़ा सर्जिकल औजार: 13 डॉक्टरों पर एफआईआर, एरा मेडिकल कॉलेज पर गंभीर आरोप
लखनऊ से सामने आया यह मामला चिकित्सा लापरवाही की एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश करता है।
पेट दर्द के इलाज के दौरान महिला के शरीर में सर्जिकल औजार छोड़ दिए जाने के आरोप में
13 डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
मामले में एरा मेडिकल कॉलेज के दो मालिकों के खिलाफ भी कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। 🚨
🩺 क्या है पूरा मामला?
टाकुरगंज स्थित एरा मेडिकल कॉलेज में जनवरी 2023 में एक महिला मरीज का ऑपरेशन किया गया।
आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने महिला के पेट में सर्जिकल औजार छोड़ दिया,
जिसे शिकायत के बावजूद नजरअंदाज किया गया।
पीड़िता को लगातार दर्द होता रहा, लेकिन उसे केवल दवाइयां देकर घर भेज दिया गया। 😔
🔁 बार-बार ऑपरेशन, फिर भी नहीं मिला राहत
पीड़िता के अनुसार, 27 फरवरी 2023 को पहला ऑपरेशन हुआ,
इसके बाद 17 मार्च को दोबारा सर्जरी की गई और
23 मार्च को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
हालांकि दर्द कम नहीं हुआ।
बाद में जब दूसरे अस्पताल में जांच कराई गई तो सीटी स्कैन में पेट के अंदर सर्जिकल औजार होने की पुष्टि हुई। 🧾
🏥 दूसरे अस्पताल में खुला राज
20 अगस्त को पीड़िता का ऑपरेशन कर पेट से सर्जिकल औजार निकाला गया।
इसके बाद पीड़िता ने आरोप लगाया कि एरा मेडिकल कॉलेज ने इलाज के नाम पर
पांच लाख रुपये भी वसूल लिए और सच्चाई छिपाने की कोशिश की। 💰
⚖️ जिम्मेदारों ने नहीं सुनी, कोर्ट की ली शरण
पीड़िता ने 27 और 28 अगस्त को पुलिस आयुक्त,
सीएमओ और जिलाधिकारी से शिकायत की,
लेकिन जब कहीं सुनवाई नहीं हुई तो उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट के आदेश पर आखिरकार एफआईआर दर्ज की गई। 🏛️
🚫 निजी अस्पताल के संचालन पर रोक के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए निजी अस्पताल के संचालन पर रोक लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
आरोप है कि अस्पताल का लाइसेंस निरस्त होने के बावजूद संचालन जारी था।
इस लापरवाही ने मरीज की हालत और बिगाड़ दी। 🚑
👨⚕️ किन-किन पर दर्ज हुई एफआईआर?
एफआईआर में एरा मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों और प्रबंधन से जुड़े लोगों के नाम शामिल हैं,
जिनमें डॉ. सुमन, डॉ. नूपुर, डॉ. श्रेया मिश्रा, डॉ. आयुष वर्मा समेत
कई डॉक्टरों के साथ कॉलेज के मालिक भी आरोपी बनाए गए हैं।
पुलिस ने कहा है कि पीड़िता का बयान दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। 📑
🗣️ प्रशासन की प्रतिक्रिया
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बयान दिया है कि
जांच में सच्चाई सामने आएगी और यदि आरोप सही पाए गए तो
दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला चिकित्सा शिक्षा और इलाज की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ⚠️
✨ निष्कर्ष
यह घटना न केवल चिकित्सा लापरवाही का उदाहरण है,
बल्कि यह भी दिखाती है कि समय पर कार्रवाई न होने पर पीड़ित को कितनी परेशानी उठानी पड़ती है।
अब सभी की नजरें जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं,
ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। 🙏
