हैदराबाद: साइबर अपराधियों ने ठगी का एक खौफनाक जाल बुनकर हैदराबाद के एक बुजुर्ग को अपना शिकार बनाया है। ‘डिजिटल अरेस्ट’ के इस मामले में ठगों ने एक 80 वर्षीय बुजुर्ग को डरा-धमका कर दो महीने के भीतर 7.12 करोड़ रुपये की मोटी रकम ऐंठ ली।
पार्सल के नाम पर शुरू हुआ डराने का खेल
पुलिस जांच के अनुसार, ठगी की यह कहानी 27 अक्टूबर 2025 को शुरू हुई। ठगों ने बुजुर्ग को फोन कर खुद को एक नामी कूरियर कंपनी का प्रतिनिधि बताया। उन्होंने दावा किया कि बुजुर्ग के नाम पर थाईलैंड से एक संदिग्ध पार्सल भेजा गया है, जिसमें मादक पदार्थ (Drugs), पासपोर्ट, और कई डेबिट-क्रेडिट कार्ड मिले हैं।
खुद को बताया मुंबई पुलिस का अधिकारी
बुजुर्ग को पूरी तरह से डराने के लिए ठगों ने कहा कि यह मामला अब मुंबई पुलिस को सौंप दिया गया है। इसके तुरंत बाद, एक अन्य आरोपी ने फोन किया और खुद को मुंबई पुलिस का बड़ा अधिकारी बताया। गिरफ्तारी और सामाजिक बदनामी के डर से बुजुर्ग घबरा गए, जिसका फायदा उठाकर ठगों ने ‘मामला रफा-दफा’ करने के नाम पर वसूली शुरू कर दी।
2 महीने तक अलग-अलग खातों में जमा कराए करोड़ों
ठगों ने बुजुर्ग को मनोवैज्ञानिक रूप से बंधक (Digital Arrest) बना लिया और बार-बार फोन करके रकम की मांग करते रहे। पिछले दो महीनों के दौरान, बुजुर्ग ने अपनी जमा पूंजी से 7.12 करोड़ रुपये ठगों द्वारा बताए गए विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। मामला तब सामने आया जब बुजुर्ग को ठगी का एहसास हुआ और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
‘सरकारी कलम’ की सलाह: डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें?
- पुलिस कभी वीडियो कॉल पर अरेस्ट नहीं करती: याद रखें, कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस वीडियो कॉल के जरिए किसी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है।
- अनजान पार्सल के कॉल से रहें सावधान: यदि कोई कहे कि आपके पार्सल में ड्रग्स या अवैध सामान मिला है, तो घबराएं नहीं। तुरंत स्थानीय पुलिस या नजदीकी साइबर सेल को सूचित करें।
- हेल्पलाइन नंबर: किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत 1930 डायल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
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