⚖️ इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला: प्रतीक्षा सूची में नाम होने से नियुक्ति का अधिकार नहीं
प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रतीक्षा सूची में शामिल अभ्यर्थी को नियुक्ति का कानूनी अधिकार नहीं है, और ऐसी सूची अनिश्चित समय तक जारी नहीं रखी जा सकती। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकलपीठ ने इस टिप्पणी के साथ नीतीश मौर्य व चार अन्य की याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
📌 मामला क्या था?
याचीगण ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड (UPSESSB) के विज्ञापन संख्या 01/2016 के तहत एलटी ग्रेड (असिस्टेंट टीचर) भर्ती में हिस्सा लिया था।
- यह भर्ती प्राइवेट मैनेजमेंट वाले मान्यता प्राप्त और सहायता प्राप्त हायर सेकेंडरी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए थी।
- कुल 22 विषयों में 7,950 पद थे।
- याचीगण का नाम मेरिट लिस्ट या प्रतीक्षा सूची में नहीं आया, इसलिए उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया।
🏛️ कोर्ट ने क्या कहा?
- प्रतीक्षा सूची का आकार:
कोर्ट ने कहा कि बोर्ड को रिक्त पदों के 25 प्रतिशत तक प्रतीक्षा सूची प्रकाशित करना जरूरी नहीं था। यह 5 या 10 प्रतिशत तक भी हो सकता है। - नियुक्ति का अधिकार:
केवल प्रतीक्षा सूची में होने मात्र से किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति पाने का कानूनी अधिकार नहीं मिलता। - अनिश्चित समय तक सूची नहीं हो सकती:
प्रतीक्षा सूची अनिश्चित काल के लिए जारी नहीं रखी जा सकती, और चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
इस निर्णय के बाद याचिकाओं में कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
📄 अनुभव प्रमाणपत्र विवाद: जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती
वहीं वर्ष 2022 की जूनियर हाई स्कूल शिक्षक भर्ती (प्रधानाध्यापक / सहायक अध्यापक) में लगभग 1515 पदों के लिए लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के अनुभव प्रमाणपत्र विवाद का नया संकट बन गए हैं।
- लगभग 99% अभ्यर्थियों के अनुभव प्रमाणपत्र अभी तक अनुमोदन की प्रति न होने के कारण अधूरी मानी जा रही है।
- कुछ अभ्यर्थियों ने अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) को ज्ञापन देकर यह समस्या समाधान करने की मांग की है।
- बेसिक शिक्षा विभाग ने रिक्त पदों के अनुपात में दोगुने अभ्यर्थियों की अनंतिम सूची जारी की थी, जिसमें चयन के लिए अनुभव प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि मान्यता प्राप्त विद्यालयों (कक्षा 6–8) में कार्यरत प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक अपने प्रमाणपत्र समय पर प्रस्तुत करें, ताकि काउंसलिंग और अंतिम नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो सके।
✍️ सरकारी कलम की टिप्पणी
- हाई कोर्ट का स्पष्ट निर्णय: प्रतीक्षा सूची में नाम होना सिर्फ अवसर का संकेत है, नियुक्ति का अधिकार नहीं।
- प्रक्रिया की पारदर्शिता: बोर्ड और विभाग ने रिक्त पदों के अनुपात में अनंतिम सूची जारी करके चयन प्रक्रिया पूरी की, जो नियम के अनुरूप है।
- अनुभव प्रमाणपत्र की आवश्यकता: भर्ती प्रक्रिया में अंतिम सत्यापन और अनुभव प्रमाणपत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे चयन सही और न्यायसंगत हो।
यह फैसला अभ्यर्थियों और शिक्षा विभाग दोनों के लिए स्पष्ट मार्गदर्शन है कि प्रतीक्षा सूची केवल सहायक होती है, प्राथमिक अधिकार नहीं।
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