🏥 सरकारी अस्पतालों में बड़ी राहत: आयुर्वेद डॉक्टर करेंगे सर्जरी, मरीजों को मिलेगा जल्द इलाज
सरकारी एलोपैथिक अस्पतालों में मरीजों की बेसुमार भीड़ और डॉक्टरों की भारी कमी को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें अब एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही हैं। जल्द ही आयुर्वेद के परास्नातक (PG) डॉक्टरों को सर्जरी करने की अनुमति मिलने जा रही है। इससे न केवल सरकारी अस्पतालों पर बोझ कम होगा, बल्कि आम मरीजों को भी समय पर इलाज मिल सकेगा।
✂️ किन-किन सर्जरी की मिलेगी अनुमति?
नई व्यवस्था के तहत आयुर्वेद के वे चिकित्सक, जिन्होंने शल्य तंत्र (General Surgery) और शल्यक (ENT, Eye, Dental आदि) में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की है, वे निम्न सर्जरी कर सकेंगे 👇
🔹 टांका लगाना
🔹 बवासीर (Piles) का ऑपरेशन
🔹 फोड़ा-फुंसी की सर्जरी
🔹 नाक, कान और गले से जुड़ी सर्जरी
🔹 सामान्य शल्य चिकित्सा (Minor Surgeries)
➡️ इसके साथ ही सामान्य सर्जरी के मरीजों को आयुर्वेदिक अस्पतालों में भी उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
📜 केंद्र ने बनाए नियम, राज्यों को करनी है व्यवस्था
भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (CCIM) ने वर्ष 2016 में भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (स्नातकोत्तर आयुर्वेदिक शिक्षा) विनियम में संशोधन कर यह अनुमति दी थी।
इसके बाद 2020 में इसमें और संशोधन किया गया।
📌 नियम केंद्र बना चुका है
📌 अब इसे लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है
👉 आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में यह व्यवस्था पहले ही लागू की जा चुकी है।
🎓 छह माह का विशेष प्रशिक्षण होगा अनिवार्य
सूत्रों के अनुसार नई गाइडलाइन में यह प्रावधान किया जा रहा है कि —
🧑⚕️ आयुर्वेद PG डॉक्टरों को
🏥 एलोपैथिक अस्पतालों में 6 महीने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा
इस प्रशिक्षण में डॉक्टरों को सिखाया जाएगा 👇
✔️ इमरजेंसी मैनेजमेंट
✔️ सर्जरी के दौरान सावधानियां
✔️ एलोपैथिक सर्जरी प्रोटोकॉल
इससे मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
🏛️ आयुष विभाग कर रहा नई नियमावली की तैयारी
प्रदेश सरकार का आयुष विभाग इस व्यवस्था को लागू करने के लिए नई गाइडलाइन और नियमावली तैयार कर रहा है। इसे कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू किया जाएगा।
🔹 अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन
🔹 आयुर्वेद अस्पतालों में संसाधनों की व्यवस्था
🔹 योग्य डॉक्टरों की सूची तैयार
🗣️ क्या बोले आयुष विभाग के प्रमुख सचिव?
“आयुर्वेद में सर्जरी की पढ़ाई पहले से होती है। अनुमति मिलने से मरीजों को सीधा लाभ होगा। आयुर्वेद अस्पतालों में इसके लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।”
— रंजन कुमार, प्रमुख सचिव (आयुष)
⚠️ IMA का विरोध, लेकिन मरीजों के हित में फैसला
इस फैसले का इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) विरोध कर रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि —
✔️ डॉक्टर प्रशिक्षित होंगे
✔️ केवल PG डिग्रीधारी ही सर्जरी करेंगे
✔️ इससे ग्रामीण और दूरदराज इलाकों के मरीजों को बड़ा फायदा होगा
🌿 एलोपैथी में बढ़ रही आयुर्वेद की स्वीकार्यता
कोरोना काल के बाद आयुर्वेद की उपयोगिता और प्रभाव को एलोपैथिक डॉक्टर भी मानने लगे हैं।
🔹 लिवर रोग
🔹 इम्युनिटी
🔹 डायबिटीज
🔹 हृदय रोग
🔹 मोटापा
➡️ इन बीमारियों में अब आयुर्वेद + एलोपैथी दोनों पद्धतियों को मिलाकर इलाज किया जा रहा है।
🏥 हर PHC पर दोनों पद्धतियों के डॉक्टर
वर्तमान में हर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) पर —
👨⚕️ एक एलोपैथ डॉक्टर
🌿 एक आयुर्वेद चिकित्साधिकारी
दोनों मिलकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को सफल बना रहे हैं।
🧠 निष्कर्ष: मरीजों को होगा सीधा फायदा
आयुर्वेद डॉक्टरों को सर्जरी की अनुमति देना एक क्रांतिकारी कदम है।
इससे —
✅ सरकारी अस्पतालों पर बोझ कम होगा
✅ मरीजों को समय पर इलाज मिलेगा
✅ ग्रामीण भारत को विशेष लाभ होगा
👉 सरकारी कलम इस फैसले का स्वागत करता है, क्योंकि यह निर्णय सीधे आम जनता और मरीजों के हित में है।
