🐕 बिना चहारदीवारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा का बोझ शिक्षकों पर!
सवाल यह—नगर निगम, प्रशासन और सरकार की जिम्मेदारी कहां गई?
प्रदेश के बिना चहारदीवारी और गेटविहीन परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा का पूरा दायित्व अब प्रधानाध्यापक या नामित नोडल शिक्षक पर डाल दिया गया है।
यह निर्देश बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार द्वारा जारी किया गया है, जो उच्च न्यायालय में दायर एक वाद के निर्णय के आलोक में दिया गया है।
👉 खास बात यह है कि यह आदेश मुख्य रूप से आवारा कुत्तों से बच्चों की सुरक्षा को लेकर जारी हुआ है।
⚠️ कुत्ता काटे तो गुरुजी अस्पताल ले जाएंगे!
क्या शिक्षक अब शिक्षक नहीं, एम्बुलेंस और सुरक्षा गार्ड भी हैं?
निर्देशों के अनुसार—
🐾 यदि विद्यालय परिसर में किसी बच्चे को कुत्ता काट ले,
तो
➡️ नोडल शिक्षक या प्रधानाध्यापक बच्चे को अस्पताल ले जाएंगे
➡️ एंटी-रेबीज दवा की व्यवस्था कराएंगे
➡️ स्वास्थ्य केंद्र से समन्वय स्थापित करेंगे
😡 सरकारी कलम सवाल पूछता है—
क्या शिक्षक की ड्यूटी अब पढ़ाने से हटकर
कुत्तों से बचाने, इलाज कराने और प्रशासनिक चूक ढकने की हो गई है?
🧑🏫 हर स्कूल में नोडल शिक्षक अनिवार्य
नाम बोर्ड पर लगेगा, जिम्मेदारी अकेले की होगी
बीएसए के निर्देश के मुताबिक—
- हर ऐसे स्कूल में एक नोडल शिक्षक नामित किया जाएगा
- उनका नाम विद्यालय के गेट/सूचना पट पर चस्पा होगा
- इसकी सूचना स्थानीय निकाय को भी दी जाएगी
📌 यानी अगर कोई हादसा हुआ—
❌ जिम्मेदारी शिक्षक की
❌ जवाबदेही शिक्षक की
❌ मीडिया ट्रायल शिक्षक का
🏫 बीईओ को आदेश: गेटविहीन स्कूल चिन्हित करें
खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को निर्देश दिए गए हैं कि—
- अपने विकासखंड के
- सभी चहारदीवारी व गेटविहीन
- परिषदीय व सहायता प्राप्त विद्यालयों
को चिन्हित करें और
➡️ वहां किसी एक शिक्षक को निगरानी के लिए अनिवार्य रूप से नामित करें।
📢 इसकी रिपोर्ट बीएसए कार्यालय को देनी होगी।
🐶 नगर निगम बनाएगा शेल्टर होम, लेकिन तब तक जोखिम कौन उठाए?
इधर प्रयागराज में नगर निगम ने दावा किया है कि—
- शहर के चार जोन में शेल्टर होम बनाए जाएंगे
- हर शेल्टर होम 1 से 1.5 एकड़ में होगा
- शहर में लगभग 5000 आवारा कुत्ते और
- 151 से अधिक सार्वजनिक स्थान चिह्नित हैं
👉 सवाल यह है कि
जब तक शेल्टर होम बनेंगे,
तब तक बच्चों की जान की गारंटी कौन देगा—
शिक्षक?
❗ सरकारी कलम की दो टूक राय
🧑🏫 शिक्षक सुरक्षा कर्मी नहीं हैं
🏫 बिना चहारदीवारी स्कूल प्रशासन की विफलता है
🐕 आवारा कुत्तों की जिम्मेदारी नगर निगम की है
फिर भी—
👉 हर जोखिम शिक्षक के सिर पर डाल देना
न्यायसंगत नहीं है।
✊ मांगें जो सरकार को माननी होंगी
✔️ सभी विद्यालयों में तत्काल चहारदीवारी व गेट निर्माण
✔️ स्कूल सुरक्षा के लिए अलग से सुरक्षा व्यवस्था
✔️ दुर्घटना की स्थिति में शिक्षकों को कानूनी संरक्षण
✔️ शिक्षकों पर एकतरफा जिम्मेदारी डालने वाले आदेश पर पुनर्विचार
✍️ निष्कर्ष
बच्चों की सुरक्षा बेहद जरूरी है,
लेकिन प्रशासनिक लापरवाही की कीमत शिक्षक क्यों चुकाएं?
👉 सरकारी कलम शिक्षकों के साथ खड़ा है
और साफ कहता है—
समस्या का समाधान शिक्षक नहीं, व्यवस्था सुधार से होगा।
✍️ सरकारी कलम
📰 जहां सवाल भी शिक्षक के पक्ष में होते हैं
