📢 25 दिसंबर को प्रस्तावित कार्यक्रम में शिक्षकों व कर्मचारियों की अनिवार्य ड्यूटी, आदेश जारी
सीतापुर।
जनपद सीतापुर में दिनांक 25 दिसंबर 2025 को प्रस्तावित एक कार्यक्रम को लेकर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा सभी शैक्षणिक कर्मियों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस आदेश के अंतर्गत प्रधानाध्यापक, सहायक अध्यापक, शिक्षामित्र, अनुदेशक एवं रसोइया सभी शामिल हैं।
📝 पहले ही लगाई जा चुकी है ड्यूटी
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी सूचना के अनुसार, संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा अपने-अपने विकास खंडों में कार्यरत समस्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों की ड्यूटी पूर्व में ही निर्धारित कर दी गई है। साथ ही इसकी जानकारी अधोहस्ताक्षरी (जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी) को भी दे दी गई है।
⏰ समय से पहुंचना अनिवार्य
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिन शिक्षकों एवं कर्मचारियों की ड्यूटी इस कार्यक्रम में लगाई गई है, उन्हें निर्धारित स्थल पर निर्धारित समय से उपस्थित होना अनिवार्य होगा।
⚠️ अनुपस्थिति की स्थिति में कठोर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
❗ शिक्षकों में नाराजगी के संकेत
हालांकि प्रशासन की मंशा कार्यक्रम को सफल बनाने की है, लेकिन लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों में शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने को लेकर शिक्षकों में पहले से ही असंतोष बना हुआ है।
🎓 शिक्षक संगठनों का कहना है कि—
- शिक्षकों का मूल कार्य शिक्षण है
- अवकाश के दिनों में भी ड्यूटी लगाया जाना मानसिक व पारिवारिक दबाव बढ़ाता है
- रसोइयों एवं शिक्षामित्रों पर भी अनावश्यक प्रशासनिक बोझ डाला जा रहा है
🤔 अवकाश के दिन कार्यक्रम क्यों?
25 दिसंबर जैसे दिन, जिसे आमतौर पर अवकाश और पारिवारिक समय के रूप में देखा जाता है, उस दिन ड्यूटी लगाया जाना कई सवाल खड़े करता है।
शिक्षक समुदाय का मानना है कि यदि ऐसे कार्यक्रम आवश्यक हैं, तो उन्हें कार्यदिवसों में या वैकल्पिक व्यवस्था के साथ आयोजित किया जाना चाहिए।
📌 आदेश का सार
🔹 25 दिसंबर 2025 को कार्यक्रम प्रस्तावित
🔹 सभी श्रेणी के शिक्षकों व कर्मचारियों की ड्यूटी अनिवार्य
🔹 समय से उपस्थित न होने पर कार्रवाई
🔹 आदेश जारीकर्ता – अखिलेश प्रताप सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, सीतापुर
✍️ सरकारी कलम की राय
शिक्षक प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं। उनसे सहयोग अपेक्षित है, लेकिन लगातार दबाव और चेतावनी की भाषा कहीं न कहीं उनके मनोबल को कमजोर करती है। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे शिक्षकों के सम्मान, अवकाश और कार्य-सीमाओं का भी उतना ही ध्यान रखें जितना कार्यक्रमों की सफलता का।

