शिक्षकों के लिए कैशलेस इलाज का शासनादेश जल्द, विधान परिषद में सरकार का आश्वासन 🏥📜


शिक्षकों के लिए कैशलेस इलाज का शासनादेश जल्द, विधान परिषद में सरकार का आश्वासन 🏥📜

लखनऊ।
उत्तर प्रदेश के शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के लिए राहत भरी खबर है। विधान परिषद में शुक्रवार को सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि कैशलेस इलाज की सुविधा से जुड़ा शासनादेश अतिशीघ्र जारी किया जाएगा। यह सुविधा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 5 सितंबर (शिक्षक दिवस) पर घोषित की गई थी।

सरकार की ओर से नेता सदन उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने यह आश्वासन समाजवादी पार्टी के सदस्य डॉ. मान सिंह यादव के प्रश्न के उत्तर में दिया।


मुख्यमंत्री की घोषणा लागू होकर रहेगी : केशव मौर्य 💬

नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने सदन में कहा—

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“मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा का मतलब ही होता है कि उसे लागू किया जाएगा। कैशलेस इलाज की सुविधा के लिए शासनादेश जल्द जारी होगा।”

उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों के कल्याण को लेकर पूरी तरह गंभीर है और इसमें किसी तरह की अनदेखी नहीं की जा रही है।


तीन महीने बीते, शासनादेश नहीं : विपक्ष का सवाल ⏳❓

सपा सदस्य डॉ. मान सिंह यादव ने सरकार से पूछा था कि—

  • क्या वित्तविहीन शिक्षकों को भी कोई सुविधा देने का निर्णय लिया गया है?

इस पर नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने सरकार को घेरते हुए कहा कि—

“कैशलेस इलाज की घोषणा को तीन महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक शासनादेश तक जारी नहीं किया गया।”

विपक्ष का कहना था कि जब तक शासनादेश जारी नहीं होता, तब तक घोषणा का लाभ जमीनी स्तर पर नहीं मिल पाता।


लाखों शिक्षकों की निगाहें शासनादेश पर 👀

गौरतलब है कि कैशलेस चिकित्सा सुविधा—

  • बेसिक शिक्षा
  • माध्यमिक शिक्षा
  • शिक्षामित्र
  • अनुदेशक

से जुड़े लाखों कर्मियों के लिए प्रस्तावित है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो गंभीर बीमारी या आपात स्थिति में शिक्षकों को बिना आर्थिक दबाव के इलाज मिल सकेगा।


सरकारी कलम का पक्ष ✍️

सरकारी कलम का मानना है कि—

  • शिक्षक समाज का बौद्धिक स्तंभ हैं
  • उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा करना सरकार का नैतिक और संवैधानिक दायित्व है
  • घोषणा के बाद शासनादेश में देरी से शिक्षकों में असमंजस बढ़ता है

📢 अब समय आ गया है कि घोषणा को कागज से निकालकर ज़मीनी हकीकत बनाया जाए।


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