शिक्षा के गिरते स्तर पर विधान परिषद में हंगामा, सपा का वॉकआउट; सरकार ने दावों से किया बचाव 📚⚖️
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद में शुक्रवार को शिक्षा के गिरते स्तर, स्कूलों के मर्जर, शिक्षकों की भारी कमी और शिक्षामित्रों की दयनीय स्थिति को लेकर सपा सदस्यों ने जोरदार विरोध दर्ज कराते हुए वॉकआउट किया। विपक्ष का आरोप था कि सरकारी नीतियों के कारण गरीब और वंचित तबके के बच्चे शिक्षा से बाहर हो रहे हैं।
हालांकि, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह ने विपक्ष के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है और निपुण विद्यालय योजना इसके ठोस उदाहरणों में से एक है।
स्कूल मर्जर बनाम शिक्षा का अधिकार 🏫❓
सपा सदस्य डॉ. मान सिंह यादव ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि—
“शराब की दुकानों पर सरकार ने कम्पोजिट व्यवस्था लागू की तो उसे फायदा हुआ। वही व्यवस्था स्कूलों पर लागू कर दी गई, जिसके चलते हजारों विद्यालय बंदनुमा स्थिति में पहुंच गए और गरीब बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा आयोग में भर्ती में गड़बड़ियों के लिए एक सेवानिवृत्त डीजीपी को अध्यक्ष बना दिया गया, जिससे आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
आरटीई से पहले नियुक्त शिक्षकों से TET की शर्त पर सवाल 🎓⚠️
सपा के आशुतोष सिन्हा ने कहा कि—
“आरटीई लागू होने से पहले जिन शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी है, उनसे अब टीईटी पास करने को कहा जा रहा है, जो पूरी तरह अनुचित और अन्यायपूर्ण है।”
वहीं नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने दावा किया कि—
- प्रदेश में आठ लाख बच्चे स्कूलों से बाहर हो चुके हैं
- 2022 में चयनित शिक्षकों को आज तक नियुक्ति पत्र नहीं मिला है
सरकार का पक्ष : एक भी स्कूल बंद नहीं हुआ 📊🛡️
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि—
- एक भी स्कूल बंद नहीं किया गया है
- केवल 50 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों का मर्जर किया गया है
- 65% विद्यालयों में फर्नीचर उपलब्ध है
- 32 हजार स्कूलों में स्मार्ट क्लास संचालित हैं
- 48 हजार से अधिक विद्यालय निपुण श्रेणी में आ चुके हैं
सरकार का दावा है कि इन प्रयासों से शिक्षा का स्तर लगातार बेहतर हो रहा है।
निर्दल समूह ने उठाईं शिक्षकों की जमीनी समस्याएं 🗣️
निर्दल समूह के राजबहादुर सिंह चंदेल ने सोनभद्र के ओबरा इंटर कॉलेज में शिक्षकों के वेतन भुगतान की समस्या उठाई। इस पर जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने स्पष्ट किया कि यह विद्यालय राज्य विद्युत बोर्ड द्वारा संचालित है और कभी राजकीय विद्यालय नहीं रहा, इसलिए इन शिक्षकों को अन्य सरकारी विद्यालयों में समायोजित करने का कोई प्रावधान नहीं है।
14 लाख शिक्षकों को मिलेगा कैशलेस इलाज 🏥✨
शिक्षक दल के नेता ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने वित्तविहीन माध्यमिक शिक्षकों के लिए समान कार्य, समान वेतन का मुद्दा उठाया। इस पर मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने बताया कि—
मुख्यमंत्री ने शिक्षक दिवस पर कैशलेस चिकित्सा सुविधा की घोषणा की है।
🔹 बेसिक शिक्षा में 10.92 लाख शिक्षक – खर्च लगभग 350 करोड़ रुपये
🔹 माध्यमिक शिक्षा में करीब 3 लाख शिक्षक – खर्च लगभग 90 करोड़ रुपये
👉 कुल मिलाकर 14 लाख शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलेगा।
सदन में रखे गए आठ अहम विधेयक 📜
भोजनावकाश के बाद विधान परिषद में—
- उप्र पेंशन हकदारी विधिमान्यकरण अध्यादेश
- उप्र निजी विश्वविद्यालय संशोधन अध्यादेश
- उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग (संशोधन) अध्यादेश
- नगर निगम व सुगम्य व्यापार से जुड़े अध्यादेश
सहित आठ विधेयक पटल पर रखे गए। इसके बाद सदन को सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
सरकारी कलम का स्पष्ट पक्ष ✍️
सरकारी कलम का मानना है कि—
- शिक्षा में आंकड़ों से ज्यादा ज़रूरी ज़मीनी सच्चाई है
- स्कूल मर्जर से पहले शिक्षकों और अभिभावकों की राय अनिवार्य होनी चाहिए
- शिक्षकों की नियुक्ति, सम्मान और सुरक्षा के बिना निपुण भारत का सपना अधूरा है
📢 शिक्षा सुधार तभी सफल होगा, जब शिक्षक सुरक्षित, सम्मानित और संतुष्ट होगा।
