✊ आशा वर्कर्स राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग पर चार दिन से हड़ताल, कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन


🩺 आशा वर्कर्स का हक़ के लिए संघर्ष तेज

✊ राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग पर चार दिन से हड़ताल, कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन

प्रयागराज।
राज्य कर्मचारी का दर्जा दिए जाने सहित लंबित मांगों को लेकर बीते चार दिनों से हड़ताल पर बैठी आशा वर्कर्स ने गुरुवार को अपना आंदोलन और तेज कर दिया। बड़ी संख्या में आशा वर्कर्स ने जुलूस निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और लगभग एक घंटे तक धरना दिया। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

आशा वर्कर्स ने ऐलान किया है कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो 23 दिसंबर को प्रदेश भर की आशा वर्कर्स विधानसभा भवन का घेराव करेंगी। 🚩


🚶‍♀️ महर्षि भरद्वाज चौराहे से कलेक्ट्रेट तक जुलूस

उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू से संबद्ध) के आह्वान पर आशा वर्कर्स गुरुवार को महर्षि भरद्वाज चौराहे पर एकत्र हुईं। वहां से नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाला गया, जो कलेक्ट्रेट पहुंचकर एडीएम सिटी कार्यालय के सामने धरने में तब्दील हो गया।


📢 “एक माह पहले दिया था हड़ताल नोटिस, फिर भी अनसुनी”

धरना सभा को संबोधित करते हुए ऐक्टू प्रदेश सचिव अनिल वर्मा ने कहा—

WhatsApp Channel Join Now
WhatsApp Group Join Now
Telegram Channel Join Now

“एक माह पहले ही विधिवत हड़ताल का नोटिस दिया गया था, लेकिन सरकार और विभाग ने कोई सुनवाई नहीं की। मजबूर होकर आशा वर्कर्स को सड़क पर उतरना पड़ा है।”


💸 70 काम, लेकिन 70 रुपये भी नहीं

मंडल अध्यक्ष रेखा मौर्या ने कहा कि—

🔹 आशा वर्कर्स से करीब 70 प्रकार के कार्य लिए जा रहे हैं
🔹 लेकिन इसके बदले 70 रुपये प्रतिदिन भी नहीं मिलते
🔹 यह श्रम और पारिश्रमिक की खुली लूट है


⚠️ बकाया भुगतान और प्रोत्साहन राशि का मुद्दा

जिला सचिव मंजू ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि—

  • लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि घोटाले की मांग वर्षों से की जा रही है
  • कोविड काल की केंद्रीय अनुतोष राशि का भुगतान नहीं हुआ
  • राज्य वित्त से 28 माह का पूरा भुगतान बकाया है
  • आभा, आयुष्मान कार्ड, गोल्डन कार्ड, पोलियो, फाइलेरिया, कुष्ठ, संचारी रोग, दस्तक अभियान जैसे कार्यों का पैसा नहीं दिया गया

📜 2013 की सिफारिशें आज भी फाइलों में

धरना का संचालन करते हुए ऐक्टू जिला सचिव देवानंद ने कहा—

“2013 के भारतीय श्रम सम्मेलन में आशा वर्कर्स को राज्य कर्मी का दर्जा, न्यूनतम वेतन, स्वास्थ्य व जीवन बीमा, ईपीएफ, ईएसआई, ग्रेच्युटी और मातृत्व अवकाश देने की सिफारिश की गई थी, लेकिन ये सभी सिफारिशें आज भी धूल फांक रही हैं।”


🤝 विभिन्न संगठनों का समर्थन

धरने में भाकपा (माले) जिला प्रभारी सुनील मौर्य, आरवाइए प्रदेश उपाध्यक्ष राधा, सुभाष कुशवाहा, कल्पना पटेल, संगीता सिंह, किरन सिंह, रेखा सिंह, लालिमा, सरिता, उर्मिला, मनोरमा सहित बड़ी संख्या में आशा वर्कर्स मौजूद रहीं।


✍️ सरकारी कलम की टिप्पणी

सरकारी कलम मानता है कि—

🟢 आशा वर्कर्स स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं
🟢 महामारी से लेकर हर राष्ट्रीय अभियान में उन्होंने जान जोखिम में डालकर काम किया
🟢 लेकिन आज भी वे न्यूनतम अधिकारों से वंचित हैं

राज्य सरकार को चाहिए कि वह
✅ आशा वर्कर्स को राज्य कर्मचारी का दर्जा दे
✅ वर्षों से बकाया भुगतान तुरंत करे
✅ सम्मानजनक मानदेय और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करे

यदि सरकार अब भी चुप रही, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। 🩺✊


Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top