🖊️ सरकारी कलम | शिक्षा नीति विशेष रिपोर्ट
देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) का विलय कर अब एक नई शीर्ष संस्था बनाई जाएगी, जिसका नाम होगा विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA)।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संबंधित विधेयक को सोमवार को लोकसभा में पेश कर दिया।
🎯 राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत बड़ा सुधार
यह विधेयक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 के तहत तैयार किया गया है। संसद से पारित होते ही देश की पूरी उच्च शिक्षा व्यवस्था का स्वरूप बदल जाएगा। अब अलग-अलग नियामक संस्थाओं के स्थान पर एकीकृत, पारदर्शी और तेज़ निर्णय लेने वाली प्रणाली लागू होगी।
🏛️ क्या है विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA)?
- 🔹 VBSA उच्च शिक्षा का सुप्रीम रेगुलेटरी बॉडी होगा
- 🔹 इसके अध्यक्ष का चयन राष्ट्रपति करेंगे
- 🔹 VBSA के अंतर्गत तीन स्वतंत्र परिषदें (स्तंभ) होंगी
🔸 तीन प्रमुख परिषदें
1️⃣ विकसित भारत शिक्षा विनियमन परिषद (Regulatory Council)
- उच्च शिक्षा के लिए सामान्य नियामक के रूप में कार्य करेगी
2️⃣ विकसित भारत शिक्षा गुणवत्ता परिषद (Accreditation Council)
- स्वतंत्र प्रत्यायन (Accreditation) प्रणाली की निगरानी करेगी
3️⃣ विकसित भारत शिक्षा मानक परिषद (Standard Council)
- शैक्षणिक मानकों के निर्धारण और सुधार का दायित्व निभाएगी
VBSA इन तीनों परिषदों के बीच समन्वय सुनिश्चित करेगी, जिससे कार्यप्रणाली में गति और पारदर्शिता आएगी।
🏫 IIT और IIM भी आएंगे दायरे में
अब तक:
- ❌ IIT और IIM, UGC/AICTE के अधीन नहीं आते थे
नई व्यवस्था में:
- ✅ IIT, IIM सहित सभी विश्वविद्यालय और कॉलेज VBSA के दायरे में होंगे
- ✅ ओपन, डिस्टेंस, ऑनलाइन और डिजिटल शिक्षा संस्थान भी शामिल
➡️ इससे पूरे देश में समान नियम और समान गुणवत्ता मानक लागू होंगे।
⚖️ कड़े प्रावधान: भारी जुर्माने का प्रावधान
नए विधेयक में नियामक परिषद को सख्त अधिकार दिए गए हैं:
- 💰 नियमों के उल्लंघन पर 10 लाख से 75 लाख रुपये तक जुर्माना
- 🏗️ बिना अनुमति उच्च शिक्षा संस्थान खोलने पर 2 करोड़ रुपये का जुर्माना
इसके अलावा:
- नियामक परिषद को विश्वविद्यालय के अलावा अन्य मान्यता प्राप्त संस्थानों को भी डिग्री प्रदान करने के लिए अधिकृत करने की शक्ति होगी
👩🏫 अध्यक्षों की नियुक्ति और योग्यता
- 🔹 तीनों परिषदों के अध्यक्षों के पास कम से कम 10 वर्ष का प्रोफेसर अनुभव अनिवार्य
- 🔹 अध्यक्ष की नियुक्ति 3 वर्ष के लिए होगी (5 वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है)
- 🔹 प्रत्येक परिषद में 14 सदस्य होंगे
- 🔹 अध्यक्ष व सदस्य केंद्र सरकार की चयन समिति की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त होंगे
कर्तव्य में लापरवाही या अक्षमता की स्थिति में:
- 🛑 राष्ट्रपति को अध्यक्ष और सदस्यों को हटाने का अधिकार होगा
✍️ सरकारी कलम की टिप्पणी
📢 उच्च शिक्षा के क्षेत्र में यह कदम वन नेशन – वन रेगुलेटर की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। अलग-अलग संस्थाओं के कारण जो भ्रम, देरी और दोहराव होता था, वह समाप्त होगा।
🔹 शिक्षकों के लिए स्पष्ट मानक
🔹 छात्रों के लिए समान गुणवत्ता
🔹 संस्थानों के लिए पारदर्शी व्यवस्था
⚠️ हालांकि, यह भी जरूरी है कि नई प्रणाली में अत्यधिक केंद्रीकरण न हो और अकादमिक स्वतंत्रता बनी रहे।
✅ सरकारी कलम मानता है कि यदि VBSA को संतुलित, पारदर्शी और संवादात्मक तरीके से लागू किया गया, तो यह भारतीय उच्च शिक्षा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला सकता है।
