⚠️ ब्रिज कोर्स को लेकर असमंजस — 69 हजार भर्ती के 30 हजार से अधिक शिक्षक संकट में 📚⏳
उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से अब तक स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी न किए जाने के कारण
69 हजार शिक्षक भर्ती के अंतर्गत बीएड के आधार पर नियुक्त 30 हजार से अधिक शिक्षक गंभीर असमंजस की स्थिति में हैं।
यह वही शिक्षक हैं, जिनके लिए सुप्रीम कोर्ट ने छह माह का प्रशिक्षण (ब्रिज कोर्स) अनिवार्य किया है।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में साफ कहा है कि—
👉 बीएड के आधार पर प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्त शिक्षकों को
👉 छह माह का ब्रिज कोर्स अनिवार्य रूप से करना होगा
इसी आदेश के अनुपालन में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) ने
👉 इन शिक्षकों के लिए ब्रिज कोर्स तैयार किया है
👉 और इसके लिए 25 दिसंबर तक ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं।
अब आवेदन की अंतिम तिथि में मात्र डेढ़ सप्ताह का समय शेष है।
🖥️ NIOS ने मांगे आवेदन, विभाग मौन
जहां एक ओर—
✔️ NIOS ने पूरे देश के लिए पोर्टल खोल दिया है
✔️ अंतिम तिथि 25 दिसंबर तय कर दी गई है
वहीं दूसरी ओर—
❌ उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से
❌ अब तक कोई स्पष्ट शासनादेश या निर्देश जारी नहीं किया गया है
इस विभागीय चुप्पी के कारण चयनित शिक्षकों की बेचैनी लगातार बढ़ती जा रही है।
🏫 अन्य राज्यों में प्रक्रिया शुरू
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के क्रम में—
✔️ मध्य प्रदेश
✔️ बिहार
✔️ केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS)
ने अपने-अपने स्तर पर स्पष्ट आदेश जारी कर दिए हैं।
इन राज्यों व संस्थानों ने—
👉 शिक्षकों को NIOS पोर्टल पर पंजीकरण कराने
👉 और समय से आवेदन करने के निर्देश दे दिए हैं
मध्य प्रदेश और बिहार में तो जिला स्तर तक दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
😟 शिक्षकों की चिंता जायज
उत्तर प्रदेश के चयनित शिक्षकों का कहना है कि—
📌 यदि समय रहते स्पष्ट आदेश नहीं आए
📌 और आवेदन से वंचित रह गए
तो हजारों शिक्षकों की नौकरी पर संकट खड़ा हो सकता है।
जबकि—
✔️ ब्रिज कोर्स सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद
✔️ उनकी नियुक्ति पूरी तरह वैध और सुरक्षित हो जाएगी
📢 सरकारी कलम की अपील
सरकारी कलम मानता है कि यह स्थिति बेहद संवेदनशील है।
👉 जब सुप्रीम कोर्ट का आदेश स्पष्ट है
👉 जब NIOS ने आवेदन की अंतिम तिथि तय कर दी है
👉 और जब अन्य राज्य पहले ही कार्रवाई कर चुके हैं
तो उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग को भी
📢 बिना देरी स्पष्ट शासनादेश जारी करना चाहिए।
🔔 एक समयबद्ध निर्णय हजारों शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित कर सकता है।
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