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स्कूल टीसी जन्म प्रमाण पत्र नहीं: हाईकोर्ट ने कहा—सिर्फ स्कूल रिकॉर्ड से नाबालिग तय नहीं किया जा सकता ⚖️
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए साफ कहा है कि सिर्फ स्कूल का ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) या एडमिशन रजिस्टर में दर्ज जन्म तिथि, किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act), धारा 94 में जन्म प्रमाण पत्र की आवश्यकता को पूरा नहीं करती।
यह फैसला न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति ज़फीर अहमद की खंडपीठ ने दिया।
🔍 मामला क्या था?
एक विवाहित जोड़े ने याचिका दाखिल कर कहा कि उन्होंने 2023 में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार शादी की।
लेकिन लड़की की मां ने अपहरण की एफआईआर दर्ज कराते हुए दावा किया कि बेटी की जन्मतिथि 11 मई 2008 है, यानी वह “नाबालिग” है।
वहीं लड़की ने कोर्ट में कहा कि वह 19 साल की है, और:
- उसका आधार कार्ड,
- मेडिकल जांच,
दोनों में उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक बताई गई।
🏛️ बाल कल्याण समिति ने सिर्फ टीसी पर भरोसा किया
बाल कल्याण समिति, कन्नौज ने स्कूल टीसी में लिखी जन्मतिथि (11 मई 2008) के आधार पर उसे नाबालिग मानते हुए कानपुर नगर के सरकारी चिल्ड्रन होम भेज दिया।
इसके खिलाफ लड़की और उसके पति ने हैबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दाखिल की।
⚖️ सरकार की दलील — याचिका सुनवाई योग्य नहीं
सरकारी वकील ने कहा कि बाल कल्याण समिति JJ Act की धारा 27(9) के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास की शक्तियों के साथ कार्य करती है।
इसलिए इसके आदेश के खिलाफ सीधे हैबियस कॉर्पस की रिट नहीं दी जा सकती।
उन्होंने “रचना बनाम राज्य” मामले का हवाला दिया।
🏛️ हाईकोर्ट ने दलील ठुकराई — कहा “अधिकार क्षेत्र हो तो ही आदेश वैध”
खंडपीठ ने कहा:
✔️ सामान्यतः न्यायिक हिरासत के खिलाफ हैबियस कॉर्पस स्वीकार नहीं होती,
लेकिन **यदि आदेश–
- अधिकार क्षेत्र के बिना,
- पूरी तरह अवैध, या
- यांत्रिक/बिना जांच के जारी हुआ हो**,
तो हाईकोर्ट हस्तक्षेप कर सकता है।
और ऐसे मामलों में
👉 बंदी को रिहा करने का आदेश भी दिया जा सकता है।
🔥 कोर्ट का स्पष्ट संदेश:
सिर्फ अप्रमाणित स्कूल रिकॉर्ड के आधार पर किसी को नाबालिग मानना कानून सम्मत नहीं है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि–शाही ईदगाह विवाद: आज होगी हाईकोर्ट में अहम सुनवाई 🕉️⚖️
प्रयागराज। मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि–शाही ईदगाह विवाद की सुनवाई आज (12 दिसंबर 2025) इलाहाबाद हाईकोर्ट में होगी।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकलपीठ करेगी।
📌 पिछली सुनवाई 7 नवंबर को हुई थी
वाद संख्या—4 में
वादी आशुतोष ब्रह्मचारी ने कोर्ट को बताया कि वे संशोधन प्रार्थना पत्र दायर करेंगे।
उनका दावा:
- विवादित भूमि पर खड़ा ढांचा अभिलेख-विहीन है,
- वैधानिक आधार नहीं,
- वुज़ुखाने के नीचे प्राचीन मूर्तियां दबाई गईं,
- सरकारी रिकॉर्ड में ईदगाह का नाम दर्ज नहीं,
- इसलिए भूमि मूल रूप से श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर की है।
🙏 आध्यात्मिक साक्ष्यदाता जोड़े जाएंगे
वाद में
पद्मविभूषण जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी
आचार्य रामचंद्र दास महाराज को भी पक्षकार बनाया जाएगा।
उनके पास
- धार्मिक परंपराओं,
- संरक्षित साक्ष्यों,
- और ऐतिहासिक निरंतरता
से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी है।
इसलिए उन्हें आध्यात्मिक साक्ष्यदाता के रूप में शामिल किया जा रहा है।
