**टीईटी अनिवार्यता के विरोध में जंतर-मंतर पर गरजे शिक्षक ✊
एआईपीटीएफ के बैनर तले देशभर के 3 लाख से अधिक शिक्षक जुटे**
नई दिल्ली। टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ गुरुवार को यूपी समेत पूरे देश से आए तीन लाख से अधिक शिक्षकों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर जोरदार प्रदर्शन किया। यह विशाल आंदोलन अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ (AIPTF) के बैनर तले आयोजित किया गया, जिसने केंद्र सरकार का ध्यान अपनी ओर खींचा।
संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पाण्डेय ने स्पष्ट कहा कि
➡️ शिक्षा अधिकार अधिनियम (RTE) लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से मुक्त करना समय की मांग है।
उन्होंने बताया कि पिछले कई वर्षों में शिक्षक लगातार निपुण भारत मिशन, पीएम श्री विद्यालय, अटल आवासीय विद्यालय जैसे बड़े अभियानों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
“तकनीक सीखकर बच्चे को आधुनिक शिक्षा दे रहे शिक्षक, फिर भी तनाव में” 😔
श्री पाण्डेय ने कहा कि शिक्षक आज स्मार्ट क्लास, तकनीकी प्रशिक्षण और नयी शैक्षिक विधियों का उपयोग कर बच्चों को बेहतर शिक्षा दे रहे हैं।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश में टीईटी की अनिवार्यता ने हजारों शिक्षकों को तनाव और असुरक्षा की स्थिति में ला दिया है।
देशभर से 1200–1500 किमी की यात्रा कर दिल्ली पहुँचे शिक्षक 🚆🚌
उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात समेत कई राज्यों से शिक्षक
➡️ 1200–1500 किलोमीटर की लंबी यात्रा
करके दिल्ली पहुँचे और टीईटी अनिवार्यता से छूट की मांग की।
संघ ने कहा कि सरकार को इन समर्पित शिक्षकों के संघर्ष का सम्मान करना चाहिए और
➡️ तुरंत ठोस निर्णय लेकर सेवा-सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
20 लाख शिक्षकों की सेवा सुरक्षा दांव पर 😟
इस मुद्दे का प्रभाव केवल यूपी के 2 लाख शिक्षकों पर ही नहीं, बल्कि पूरे देश के
➡️ लगभग 20 लाख शिक्षकों
पर पड़ेगा। इसलिए शिक्षकों ने एक स्वर में सरकार से आग्रह किया कि
शिक्षा अधिकार अधिनियम से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से मुक्त किया जाए।
