✅💥50 लाख का बीमा क्लेम ठगने की कोशिश: ब्रजघाट श्मशान घाट पर प्लास्टिक की डमी का अंतिम संस्कार कराने पहुंचे दो आरोपी गिरफ्तार

50 लाख का बीमा क्लेम ठगने की कोशिश: ब्रजघाट श्मशान घाट पर प्लास्टिक की डमी का अंतिम संस्कार कराने पहुंचे दो आरोपी गिरफ्तार
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देश में फर्जीवाड़े के कई मामले सामने आते रहते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के ब्रजघाट श्मशान घाट में सामने आया ताजा मामला वाकई हैरान करने वाला है। यहां 50 लाख रुपये की बीमा राशि हड़पने के लिए दो आरोपी प्लास्टिक की डमी (पुतला) को इंसानी शव बताकर उसका अंतिम संस्कार कराने पहुंचे थे। लेकिन नगर पालिका कर्मी की सतर्कता ने उनकी पूरी साजिश को बेनकाब कर दिया।


✦ कैसे पकड़ा गया खेल?

गुरुवार दोपहर करीब 1 बजे दिल्ली की कैलाशपुरी कॉलोनी के कपड़ा व्यापारी कमल सोमानी और जैन कॉलोनी निवासी उसके साथी आशीष खुराना कार में एक ‘शव’ लेकर ब्रजघाट श्मशान पहुंचे।
दोनों ने
✔️ लकड़ी खरीदी
✔️ चिता तैयार की
✔️ और पुतले को शव बताकर आग लगाने की तैयारी शुरू कर दी।

लेकिन तभी मैदान में उतरे नगर पालिका कर्मचारी नितिन, जिन्होंने नाम-पता पूछते समय ही कुछ गड़बड़ समझ ली।


✦ पूछताछ में झूठ की परतें खुलीं

कर्मचारी ने मृतक का नाम व पता पूछा तो आरोपियों ने बताया:
👉 नाम: अंशुल
👉 निवासी: करोल बाग, दिल्ली
👉 मौत: दिल्ली के अस्पताल में

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लेकिन केवल दो लोगों को शव के साथ देखकर कर्मचारी को और शक हुआ। जब उसने मृतक का चेहरा दिखाने को कहा, तो दोनों टालमटोल करने लगे।

इसी दौरान कर्मचारी ने कफन हटाकर पहले पैर देखे—
और जो दिखा, उसने सबको चौंका दिया!
👉 पैर इंसान के नहीं, बल्कि प्लास्टिक की डमी के थे।

चेहरा खोलते ही पूरा सच सामने आ गया।


✦ असली कहानी: बीमा क्लेम का खेल

पूछताछ में कपड़ा व्यापारी कमल सोमानी ने खुलासा किया कि—
✔️ नौकर के भाई का 50 लाख का बीमा उसने खुद ही कराया था
✔️ वह बीमा राशि हड़पना चाहता था
✔️ इसी कारण वह फर्जी मृत्यु प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए डमी को जलाने आया था

फर्जी अंतिम संस्कार के बाद वे नगर पालिका से डेथ सर्टिफिकेट लेकर बीमा कंपनी में दावा पेश करने वाले थे।


✦ पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने मौके से ही
👉 कमल सोमानी
👉 आशीष खुराना
को गिरफ्तार कर लिया।

दोनों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

नगर पालिका कर्मचारी नितिन की सतर्कता से एक बड़ी बीमा धोखाधड़ी टल गई।


✦ सरकारी कलम की राय ✍️

यह घटना बताती है कि बीमा ठगी का नेटवर्क कितना बड़ा और संगठित होता जा रहा है।
लेकिन ऐसे मामलों में कर्मचारियों की सतर्कता और जनता की जागरूकता ही बड़े अपराधों को रोक सकती है।

50 लाख की बीमा राशि के लिए मानव जीवन और कानून से खेलने की यह कोशिश बेहद शर्मनाक है।


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