उत्तर प्रदेश शासन का परिपत्र — आधार को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में स्वीकार न करने का निर्देश।

Aadhaar और जन्मतिथि प्रमाण - उत्तर प्रदेश सरकारी परिपत्र
उत्तर प्रदेश शासन का परिपत्र — आधार को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में स्वीकार न करने का निर्देश।

⚠️ उत्तर प्रदेश शासन ने कहा — आधार कार्ड को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में स्वीकार न करें (परिपत्र जारी)

लखनऊ, 24 नवंबर 2025: नियोजन विभाग के विशेष सचिव अमित सिंह बंसल द्वारा जारी परिपत्र में राज्य के सभी सचिवों एवं विभागों को निर्देश दिया गया है कि आधार कार्ड (Aadhaar) को जन्मतिथि (Date of Birth) का मान्य प्रमाण न समझा जाए। यह निर्देश UIDAI के क्षेत्रीय कार्यालय, लखनऊ के पत्र (31.10.2025) का संदर्भ लेकर जारी किया गया है। 📝

📌 परिपत्र का संक्षेप (Key points)

परिपत्र (पत्रांक: 392/21/7-363/107944/ज०नि०प्र०/2024) में मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • UIDAI का पत्र: उप-निदेशक, UIDAI क्षेत्रीय कार्यालय, लखनऊ ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड को जन्मतिथि का अनुमन्य प्रमाण नहीं माना जाता। (पत्रांक 16013/4/2020-RO-LKO/5416 दिनांक 31.10.2025)
  • राज्य के विभागों को निर्देश: बावजूद इसके कुछ विभाग अभी भी आधार को जन्मतिथि प्रमाण के रूप में स्वीकार कर रहे हैं — अतः सभी विभागों को इसका पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
  • आदेश: राज्य सरकार के समस्त विभागों को निर्देशित करें कि वे आधार कार्ड को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में स्वीकार न करें।
  • परिपत्र हस्ताक्षर: Digitally signed — (अमित सिंह बंसल), विशेष सचिव — दिनांक: 24-11-2025 16:31:17

🔎 क्यों यह जरूरी निर्देश आया?

UIDAI और अन्य संबंधित संस्थाओं की नीति स्पष्ट करती है कि आधार का प्राथमिक उद्देश्य पहचान प्रमाण (identity) है, न कि जन्मतिथि का वैधानिक प्रमाण। कई सरकारी प्रक्रियाओं में जन्मतिथि का वैध प्रमाण आवश्यक होता है (जैसे नामांकन, पेंशन, सेवाएँ, नागरिकता-सम्बन्धी दस्तावेज़ आदि) — ऐसे मामलों में अधिकृत दस्तावेज़ (जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल रिकॉर्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस आदि) माँगे जाने चाहिए। 📑

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🛑 प्रभाव — किन चीज़ों पर इसका असर पड़ेगा?

इस परिपत्र का सीधा असर निम्नलिखित प्रक्रियाओं में होगा:

  • सरकारी योजनाओं/भुगतान के लिए जन्मतिथि सत्यापन
  • भर्ती, छात्रवृत्ति, और शैक्षिक नामांकन जहाँ DOB की औपचारिक जाँच होती है
  • सेवा-नियुक्ति, पेंशन और वेतन सम्बन्धी फाइलिंग
  • किसी भी योजनात्मक लाभ के लिये जन्मतिथि-आधारित पात्रता निर्धारण

विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आने वाले आदेश तक आधार को DOB प्रमाण के रूप में स्वीकार न करें और वैध वैकल्पिक दस्तावेज़ माँगें। ✅

📢 प्रशासनिक निर्देश — क्या करना चाहिए?

  1. सभी विभाग अपने अधीनस्थ कार्यालयों और जनसेवा केन्द्रों को तत्काल सूचित करें।
  2. आवेदनों व फॉर्म्स में स्पष्ट रूप से लिखें कि आधार DOB प्रमाण मान्य नहीं
  3. जन्मतिथि के वैध विकल्प (जन्म प्रमाणपत्र, शाला रिकॉर्ड, पासपोर्ट आदि) सूचीबद्ध कर दें।
  4. जनसामान्य के लिये सूचना-पॉम्प/नोटिस प्रकाशित करें ताकि भ्रम न रहे।
  5. UIDAI से संबंधित किसी तकनीकी या नीति-संबंधी शंकाओं हेतु क्षेत्रीय UIDAI कार्यालय से संपर्क करें — परिपत्र में उप-निदेशक को भी सूचित किया गया है।

❓ सवाल-जवाब (Short FAQ)

Q1: क्या आधार को पूरी तरह बेकार समझें?

A: नहीं — आधार पहचान के लिए उपयोगी है, परन्तु जन्मतिथि के वैधानिक प्रमाण के रूप में इसे स्वीकार न करना परिपत्र का उद्देश्य है।

Q2: मेरे पास केवल आधार में ही DOB है — मैं क्या करूँ?

A: जिन मामलों में वैध DOB प्रमाण अनिवार्य है, आप अपने स्कूल रिकॉर्ड, जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस आदि की प्रतियाँ प्रस्तुत कर सकते हैं। यदि आपके पास कोई वैध प्रमाण नहीं है, संबंधित विभाग द्वारा बताए गए वैकल्पिक प्रमाण/प्रक्रिया का पालन करें।

Q3: यह निर्देश कब से लागू होगा?

A: परिपत्र दिनांक 24 नवंबर 2025 को जारी हुआ — विभागों को तत्क्षण अनुपालन के निर्देश दिए गए हैं।

नोट: यह रिपोर्ट उत्तर प्रदेश शासन के नियोजन विभाग के परिपत्र (24 नवम्बर 2025) एवं UIDAI क्षेत्रीय कार्यालय, लखनऊ के पत्र का संदर्भ लेकर संकलित की गई है। आधिकारिक विस्तृत निर्देश और संलग्नक के लिए संबंधित विभाग की वेबसाइट या जारी परिपत्र देखें।

परिपत्र का मुख्य हस्ताक्षर: (डिजिटल हस्ताक्षर)
अमित सिंह बंसल, विशेष सचिव — नियोजन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन।

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टैग: Aadhaar, जन्म तिथि प्रमाण, उत्तर प्रदेश, UIDAI, नियोजन विभाग

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